मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल की लॉ कमीशन से मुलाकात | The Voice TV

Quote :

"मेहनत का कोई विकल्प नहीं, बस मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ते रहो।"

National

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल की लॉ कमीशन से मुलाकात

Date : 24-Aug-2023

 ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी की नेतृत्व में लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, सदस्यों और अधिकारियों से उनके कार्यालय में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विधि आयोग के सामने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया और इससे संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन भी लॉ कमीशन को सौंपा है।

 
 
 
बोर्ड प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास ने बताया है कि इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बोर्ड अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने किया है। प्रतिनिधिमंडल में बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. सैयद अली मोहम्मद नकवी और जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अमीर इंजीनियर सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, बोर्ड महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर्रहीम मुजद्ददी, वरिष्ठ एडवोकेट यूसुफ हातिम मुछाला, मरकजी जमीअत अहले हदीस के अमीर मौलाना असगर अली इमाम सलफी मेहदी, मस्जिद फतेहपुरी के शाही इमाम डॉ. मुफ्ती मुकर्रम अहमद, लॉ जर्नल के चीफ एडिटर एडवोकेट एमआर शमशाद, बोर्ड प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास, बोर्ड कार्यकारिणी की सदस्य प्रो. मोनिसा बुशरा और एडवोकेट नबीला जमील इत्यादि शामिल थे। गौरतलब है कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल सभी लोग बोर्ड के पदाधिकारी या सदस्य होने के साथ-साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं।
 
 
 
बोर्ड प्रवक्ता ने बताया कि यह मुलाकात लॉ कमीशन के चेयरमैन के निमंत्रण पर की गई। उन्होंने बताया कि जब चेयरमैन लॉ कमीशन ने बोर्ड की यूसीसी पर राय जाननी चाही तो अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने इस पर उन्हें विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि जिस देश में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के मानने वाले लोग रहते हों, वहां सबके लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाना किसी भी तरह उचित नहीं है। इसलिए भी यह मुमकिन नहीं है क्योंकि हर तबके और धार्मिक गिरोह को अपने रिवाज और रस्मों से बेहद लगाव होता है। जहां तक मुसलमानों का संबंध है, वह कुरान और सुन्नत पर निर्भर हैं। उनके लिए कोई भी ऐसा कानून जो कुरान और सुन्नत से अलग हो, हरगिज भी काबिल-ए-कबूल नहीं हो सकता है। हम शरीअत से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेंगे।
 
 
 
उन्होंने बताया कि 21वें लॉ कमीशन ने हमारे सामने कई सवाल रखे थे और कमीशन के साथ मुलाकात में हमने उनके सवालों का जवाब देकर उन्हें संतुष्ट भी किया गया था। इसके बाद यह मामला रफा-दफा कर दिया गया था। हम चाहते हैं कि वर्तमान कमीशन भी हमारे जवाब से संपुष्ट हो। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों के जरिए कमीशन के सदस्यों के पूछे गए सभी सवालों का जवाब कुरान और हदीस के आलोक में देने का प्रयास किया गया है।

RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement