केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) लॉन्च की। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के मद्देनजर तैयार किया गया है। एनसीएफ अनिवार्य रूप से भारत में शिक्षा प्रणाली के लिए पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण प्रथाओं के लिए एक दिशानिर्देश के रूप में कार्य करती है।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अंतर्गत 4 उप-वर्गीकरण शामिल होंगे। इसमें स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफएसई), प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफईसीई), शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफटीई) और वयस्क शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफएई) शामिल है।
शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि छात्रों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में कम से कम दो बार बोर्ड परीक्षा की पेशकश की जाएगी। छात्र तब उन विषयों में बोर्ड परीक्षा दे सकते हैं, जिन्हें उन्होंने पूरा कर लिया है और जिसके लिए वे तैयार महसूस करते हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाए रखने का भी अवसर दिया जाएगा।
मंत्रालय के एनसीएफ ने कहा कि बोर्ड पेपर के लिए, परीक्षण डेवलपर्स और मूल्यांकनकर्ताओं को यह कार्य करने से पहले विश्वविद्यालय-प्रमाणित पाठ्यक्रमों से गुजरना होगा। शिक्षा मंत्रालय ने आगे कहा कि 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को कम से कम दो भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से एक भारतीय भाषा होनी अनिवार्य है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि स्कूली छात्रों के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा तैयार करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंत्री ने कहा कि आज भारत में शिक्षा नीति के लिए एक ऐतिहासिक दिन है और यह पाठ्यक्रम देश में न्यायसंगत और सुलभ शिक्षा के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि यह ढांचा पहले पांच वर्षों में छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधान ने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में देश का हर स्कूल राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे को लागू करेगा। मंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए इन भविष्य के दस्तावेजों को तैयार करना हम सभी के लिए एक चुनौती थी लेकिन हमारी टीम आज इसे वास्तविकता बनाने के लिए दिन-रात काम करती है।
