नई दिल्ली, 28 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सत्य, सेवा और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने सत्यनिष्ठा और सकारात्मक सोच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सेवाभाव और ईमानदारी से किया गया कोई भी कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने कहा कि संकल्प, समर्पण और सकारात्मकता के माध्यम से न केवल अपना बल्कि पूरी मानवता का भी कल्याण किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह विचार ‘एक्स’ पर साझा किए। एक्स पोस्ट में उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित भी उद्धृत किया, “सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति। सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु॥”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सुभाषित के माध्यम से सत्य, तप, यज्ञ और अनुशासन को जीवन और समाज का आधार बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मूल्य ही पृथ्वी और मानवता को स्थायित्व प्रदान करते हैं।
