मोरीगांव (असम), 22 जनवरी । जागीरोड के जॉनबील के तट पर आज से विनिमय (बिना पैसे की खरीदारी यानी सामान के बदले सामान की अदला-बदली) प्रथा पर आधारित ऐतिहासिक जॉनबील मेले का शुभारंभ हो गया। तीन दिनों तक चलने वाला यह पारंपरिक मेला 24 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। मेले के पहले दिन की शुरुआत ऐतिहासिक गोभा देवराजा की परंपरा के अनुसार देवशाल चारिभाई शिवथान में मांगलिक पूजा-अर्चना के साथ की गई।
परंपरागत रीति-रिवाजों के तहत शिवथान में पूजा संपन्न हुई, जिसके बाद गाभरू आम के पेड़ के नीचे अंडा बलि देकर 22 राजाओं द्वारा मंगल दर्शन किया गया। इसके उपरांत मेले के मुख्य स्थल पर निर्धारित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आधुनिक मुद्रा को दरकिनार कर सदियों पुरानी वस्तु-विनिमय प्रथा के जरिए जॉनबील का तट एक बार फिर जीवंत हो उठा।
उल्लेखनीय है कि आज सुबह ध्वजारोहण और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के साथ तिवा जनजीवन से जुड़े विभिन्न भवनों का उद्घाटन भी किया गया। पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले ‘मामा-मामी’ कहे जाने वाले लोग पारंपरिक वस्तु-विनिमय के लिए मेले में पहुंचे।
23 जनवरी की सुबह ऐतिहासिक विनिमय हाट का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा, जिसके बाद जॉनबील के तट पर सामूहिक मछली पकड़ने का पारंपरिक आयोजन होगा।
कार्यक्रम के तहत मध्य असम की तिवा परंपरा के अनुसार आयोजित राजदरबार में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा 22 तिवा राजाओं को राजभत्ता प्रदान करेंगे।
इसके अलावा मेले में तिवा और असमिया भाषाओं के कवि सम्मेलन, पारंपरिक नृत्य-संगीत कार्यक्रम तथा स्थानीय व्यंजनों की खाद्य मेला भी आयोजित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा सके।
