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जया एकादशी व्रत: भगवान विष्णु की कृपा और जीवन में विजय दिलाने वाला पावन उपवास

Date : 29-Jan-2026
 
सनातन परंपरा में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। प्रत्येक मास में पड़ने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसे करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। इन्हीं एकादशियों में माघ मास के शुक्लपक्ष में आने वाली जया एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत रखने से साधक को जीवन के हर क्षेत्र में विजय, सफलता और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा पाने का उत्तम साधन माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जया एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर भी है। इस व्रत को नियम और श्रद्धा के साथ करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है और उसका मन निर्मल होता है। ऐसा कहा जाता है कि जया एकादशी का पुण्य अनेक यज्ञों के समान फल देने वाला होता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति सांसारिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति भी प्राप्त करता है।
•  जया एकादशी व्रत की तैयारी दशमी तिथि से ही शुरू कर देनी चाहिए।
•  व्रत करने वाले व्यक्ति को संयम और नियम का पालन करना चाहिए।
•  मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करना चाहिए।
•  एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए।
•  स्नान के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
•  इसके बाद पूजा स्थान को साफ और शुद्ध करना चाहिए।
•  श्रीहरि की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाना चाहिए।
पूजा के समय भगवान विष्णु को चंदन, पुष्प, तुलसी दल, फल, मिष्ठान और पंचामृत अर्पित किया जाता है। तुलसी दल का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसे भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। पूजा के दौरान एकादशी व्रत की कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। कथा सुनने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है, जिससे मन एकाग्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
जया एकादशी व्रत में अन्न का सेवन वर्जित बताया गया है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक आहार का पालन करना चाहिए। कई श्रद्धालु फलाहार करते हैं, तो कुछ लोग केवल जल पर व्रत रखते हैं। यह व्यक्ति की श्रद्धा और सामर्थ्य पर निर्भर करता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों पर संयम रखना होता है।
इस व्रत का एक विशेष नियम यह भी है 
•  जया एकादशी के व्रत में तामसिक विचारों और व्यवहार से दूर रहना चाहिए।
•  व्रत के दिन झूठ बोलना नहीं चाहिए।
•  क्रोध करने और किसी से विवाद करने से बचना चाहिए।
•  किसी की निंदा, चुगली या बुरा सोचने से व्रत का फल कम हो जाता है।
•  एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
•  डिब्बाबंद पेय पदार्थ जैसे कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
•  नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाए रखनी चाहिए।
•  असात्विक और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित होता है।

जया एकादशी का पारण द्वादशी तिथि को विधि-विधान के साथ किया जाता है। पारण के बिना एकादशी व्रत अधूरा माना जाता है। पारण करते समय पहले भगवान विष्णु का स्मरण किया जाता है और फिर सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। पारण में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए और पूरी श्रद्धा के साथ व्रत का समापन करना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जया एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी माना गया है जो अपने कार्यक्षेत्र, शिक्षा, व्यापार या जीवन के किसी अन्य क्षेत्र में सफलता चाहते हैं। जया एकादशी का अर्थ ही “विजय देने वाली” एकादशी होता है, इसलिए इसे सफलता और उन्नति का व्रत भी कहा जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह व्रत मन और आत्मा को शुद्ध करने में सहायक होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति में धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच का विकास होता है। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी का पुण्य प्राप्त करने वाला व्यक्ति अंत में विष्णु लोक को प्राप्त करता है और उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।
जया एकादशी व्रत हमें यह संदेश देता है कि सच्ची विजय बाहरी संघर्ष से नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन से प्राप्त होती है। जब व्यक्ति अपने मन, इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण करता है, तभी वह वास्तविक सुख और शांति को अनुभव कर पाता है। इसीलिए सनातन परंपरा में जया एकादशी को अत्यंत पावन और कल्याणकारी माना गया है।
अंत में कहा जा सकता है कि जया एकादशी व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ किया गया यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है और साधक के जीवन को सुख, शांति और सफलता से भर देता है। यही कारण है कि सनातन धर्म में जया एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

 

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