भारत में प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को भारतीय थल सेना दिवस पूरे सम्मान, गर्व और देशभक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारतीय थल सेना के अद्वितीय साहस, कठोर अनुशासन, निष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है। थल सेना दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन वीर सैनिकों को नमन करने का अवसर है, जिनके त्याग और परिश्रम से देश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
यह दिन भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध परंपराओं को स्मरण करने के साथ-साथ वर्तमान में सीमाओं पर तैनात जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। दुर्गम पहाड़ों, तपते रेगिस्तानों, घने जंगलों और बर्फीले क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सैनिक जिस निष्ठा से देश की रक्षा करते हैं, वही भारतीय थल सेना की पहचान है। यह दिवस हमें यह एहसास कराता है कि हमारी स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण जीवन के पीछे सैनिकों का अदम्य साहस और अमर बलिदान निहित है।
15 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
15 जनवरी 1949 भारतीय सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन स्वतंत्र भारत को पहला भारतीय सेना प्रमुख मिला, जब फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा ने ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय थल सेना की कमान संभाली। यह घटना भारत की सैन्य संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी। इस परिवर्तन ने सेना को स्वदेशी नेतृत्व प्रदान किया और उसके आत्मविश्वास को नई दिशा दी। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में हर वर्ष 15 जनवरी को थल सेना दिवस मनाया जाता है।
भारतीय थल सेना दिवस 2026
वर्ष 2026 में भारत 78वां भारतीय थल सेना दिवस** मना रहा है। इस वर्ष की थीम है — “भारतीय सेना: शौर्य एवं बलिदान की परंपरा”, जो सेना की वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम को दर्शाती है। इस वर्ष थल सेना दिवस परेड का आयोजन जयपुर, राजस्थान में किया जा रहा है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है। पहली बार राजस्थान को इस राष्ट्रीय महत्व के आयोजन की मेज़बानी का गौरव प्राप्त हुआ है। जयपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में होने वाली यह परेड सेना की परंपरा, अनुशासन और आधुनिक सैन्य शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन प्रस्तुत करेगी।
भारतीय थल सेना की शक्ति और भूमिका
भारतीय थल सेना विश्व की सबसे बड़ी और सक्षम सेनाओं में से एक है। इसे ऊँचाई वाले और कठिन इलाकों में युद्ध कौशल के लिए विशेष रूप से जाना जाता है, जिसका उदाहरण सियाचिन ग्लेशियर है। इसके साथ ही भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और वैश्विक शांति व स्थिरता में योगदान देती है।
युद्ध से आगे राष्ट्रसेवा
भारतीय थल सेना का योगदान केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। आपदा राहत, आतंकवाद विरोधी अभियान, आंतरिक सुरक्षा और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्यों में भी सेना अग्रणी भूमिका निभाती है।
अंततः, भारतीय थल सेना दिवस हमें वीर जवानों के साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की याद दिलाता है। यह दिन आने वाली पीढ़ियों को अनुशासन, समर्पण और देशसेवा के मूल्यों से प्रेरित करता है तथा हर नागरिक के मन में भारतीय सेना के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को और सुदृढ़ करता है।
