ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर, ट्रंप ने बताया 'शानदार सफलता'
अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों—फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान—पर सटीक हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों को "शानदार सफलता" करार देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को रोकने के लिए यह निर्णायक कार्रवाई की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि सभी अमेरिकी विमान अब सुरक्षित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र से बाहर लौट आए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि "प्राथमिक लक्ष्य फोर्डो पर GBU-57A मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर ('बंकर बस्टर') बम का पूरा पेलोड गिराया गया।" उन्होंने ईरान से युद्ध समाप्त करने की अपील करते हुए कहा, "अब शांति का समय है।"
अमेरिकी रक्षा विभाग ने पुष्टि की है कि प्रत्येक परमाणु स्थल पर दो-दो ‘बंकर बस्टर’ बमों का प्रयोग किया गया। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य ईरान को एक परमाणु शक्ति बनने से रोकना और आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक देश द्वारा उत्पन्न खतरे को खत्म करना है।
ईरानी सरकारी मीडिया (IRIB) ने हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान की परमाणु सुविधाएं दुश्मन के निशाने पर रहीं, लेकिन दावा किया गया कि इन स्थलों और वहां मौजूद समृद्ध यूरेनियम को पहले ही खाली करा लिया गया था।
इसी बीच, इजरायली सार्वजनिक प्रसारक ‘कान’ ने कहा है कि हमले "अमेरिका के साथ पूर्ण समन्वय में" किए गए। इजरायली वायुसेना ने भी दक्षिण-पश्चिमी ईरान में स्थित बंदर अब्बास पर हमले किए, जो कि ईरान का प्रमुख वाणिज्यिक और नौसैनिक केंद्र है। यहां एक मानव रहित हवाई वाहन डिपो और हथियार भंडारण स्थल को निशाना बनाया गया।
इस ताजा घटनाक्रम के पीछे एक पृष्ठभूमि है—ईरान ने हाल ही में इजरायल की ओर लगभग 40 ड्रोन दागे थे, जिसके जवाब में इजरायल ने दर्जनों ईरानी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें खुज़ेस्तान प्रांत का एक आपातकालीन केंद्र और एक विश्वविद्यालय भी शामिल था।
इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया में बेचैनी बढ़ा दी है। ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर कार्रवाई जारी रखता है, तो वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा, एक ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि इजरायल को हथियारों की आपूर्ति करने वाले देश भी वैध लक्ष्य माने जाएंगे।
कूटनीतिक प्रयास इस समय निष्फल दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक इजरायल के बमबारी अभियान जारी हैं, तब तक वे अमेरिका के साथ कोई भी बातचीत नहीं करेंगे।
इस तीव्र और तेजी से बदलते संघर्ष की स्थिति ने न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक गंभीर चुनौती उत्पन्न कर दी है।
