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डीआरडीओ ने शीर्ष आक्रमण क्षमता वाली मानव-पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।

Date : 13-Jan-2026

 रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गतिशील लक्ष्य के विरुद्ध शीर्ष आक्रमण क्षमता वाली मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) का सफल उड़ान परीक्षण किया है, जो भारतीय सेना में इसके शामिल होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

तीसरी पीढ़ी की "फायर एंड फॉरगेट" मिसाइल का परीक्षण 11 जनवरी को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में किया गया। यह परीक्षण हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला द्वारा संचालित किया गया था।

स्वदेशी रूप से विकसित एमपीएटीजीएम उन्नत प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित है, जिसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड (आईआईआर) होमिंग सीकर, एक ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम, एक फायर कंट्रोल सिस्टम, एक टैंडम वारहेड, एक प्रोपल्शन सिस्टम और एक उच्च-प्रदर्शन साइटिंग सिस्टम शामिल हैं। 

इन प्रौद्योगिकियों को देश भर में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है, जिनमें अनुसंधान केंद्र इमारत, हैदराबाद; टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला, चंडीगढ़; उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, पुणे; और उपकरण अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान, देहरादून शामिल हैं।

परीक्षण के दौरान दुश्मन के टैंक का अनुकरण करने के लिए जोधपुर रक्षा प्रयोगशाला द्वारा विकसित थर्मल टारगेट सिस्टम का उपयोग किया गया था। डीआरडीओ के अनुसार, आईआईआर सीकर मिसाइल को दिन और रात दोनों समय परिचालन क्षमता प्रदान करता है, जबकि टैंडम वारहेड को आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस मिसाइल प्रणाली के विकास-सह-उत्पादन भागीदार हैं।

 एमपीएटीजीएम को तिपाई से या सैन्य वाहन पर लगे लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे यह युद्धक्षेत्र की विभिन्न परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हो जाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, उसके उद्योग भागीदारों और परियोजना में शामिल सभी लोगों को बधाई दी और इसे रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि मिसाइल ने परीक्षण लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया है, जिससे भारतीय सेना में इस हथियार प्रणाली को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।


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