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महानाट्य जाणता राजा का लखनऊ में होगा भव्य मंचन

Date : 13-Sep-2023

 लखनऊ,13 सितम्बर । हिंदवी स्वराज के निर्माता छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित विश्व के सबसे बड़े ऐतिहासिक महानाट्य 'जाणता राजा' का मंचन गोमतीनगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में 26 अक्टूबर से होगा। इसका आयोजन दिव्य प्रेम सेवा मिशन करा रहा है। यह जानकारी आयोजन सह प्रभारी शतरूद्र प्रताप सिंह ने दी।

शतरूद्र प्रताप ने बताया कि हिन्दवी स्वराज के 350वें वर्ष पर आयोजित जाणता राजा नाटक का मंचन 26 से 31 अक्टूबर तक होगा। कार्यक्रम स्थल का भूमि पूजन 08 अक्टूबर को दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डाॅ. आशीष गौतम की उपस्थिति में संपन्न होगा। जाणता राजा नाटक का शुभारम्भ 26 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

छात्रों को मिलेगी विशेष छूट
जाणता राजा के नाटक को देखने के लिए 1100 रुपये का कूपन है। इस कूपन के माध्यम से नाटक एक दिन देख सकते हैं। वहीं विद्यार्थियों को यह कूपन महज 200 रुपये में मिलेंगे। यह कूपन एक दिन के लिए ही मान्य होगा।

छत्रपति शिवाजी महाराज के चरित्र की जीवंत प्रस्तुति करने वाले विश्व के सबसे बड़े ऐतिहासिक महानाट्य जाणता राजा का आयोजन दो सात्विक उद्देश्यों से किया जा रहा है। इनमें पहला यह कि वर्तमान युवा पीढ़ी के सामने एक ऐसे चरित्र की प्रस्तुति हो, जिसे देखकर और समझकर सभी नौजवान अपने जीवन की दिशा तय कर सकें। वहीं दूसरा उद्देश्य है दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सेवा कार्य से संवेदनशील समाज को जोड़ना।

विश्व का सबसे बड़ा महानाट्य

छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित जाणता राजा नामक नाटक विश्व का सबसे बड़ा महानाट्य है। 1985 में इसका पहला मंचन हुआ था। इसके बाद से इस नाटक का भारत, अमेरिका और इंग्लैंड सहित दुनियाभर में 1300 से ज्यादा बार मंचन हो चुका है। इसमें चार मंजिला रंगमंच 250 से ज्यादा कलाकार और घोड़े पर सवार सैन्यबल हमारे भीतर छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र को उतारते चले जाते हैं।
महानाट्य की विशेषता

तोप, हाथी और घोड़े पर सवार सैनिक राजा शिव छत्रपति महानाट्य को सजीव बना देते हैं। जाणता राजा नाटक के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज की विभिन्न व्यवस्थाओं और नीतियों को दिखाने का प्रयास किया गया है। नाटक में शुरू से लेकर अंत तक हिंदवी स्वराज और रामराज का ही वर्णन है। शिवाजी के शासन में कोई भेदभाव नहीं था। नाटक में दिखाया गया है कि माता जीजाबाई किस प्रकार से हिंद स्वराज और फिर रामराज के लिए हमेशा शिवाजी महाराज को प्रेरित करती हैं।
 


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