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रक्षा मंत्री ने राष्ट्र को समर्पित की अरुणाचल प्रदेश में बनी 500 मीटर लंबी 'नेचिफू सुरंग'

Date : 12-Sep-2023

 नई दिल्ली, 12 सितंबर । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश में बालीपारा-चार द्वार-तवांग (बीसीटी) रोड पर 500 मीटर लंबी ‘नेचिफू सुरंग’ का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू के देवक ब्रिज से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 90 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। यह सभी परियोजनाएं देश के 8 सीमावर्ती राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में हैं। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया का सबसे ऊंचा लड़ाकू हवाई क्षेत्र का निर्माण करने के लिए लद्दाख के न्योमा एयरबेस को अपग्रेड करने का उद्घाटन किया।

रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में आयोजित समारोह में इन परियोजनाओं का वर्चुअली उद्घाटन किया। इसके बाद बीआरओ की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि आपकी असली उपलब्धि यह है कि आपने अपने प्रयास से मुश्किल को आसान बना दिया। देश के नागरिकों ने सीमा क्षेत्र के विकास को एक उपलब्धि के रूप में लेना बंद कर दिया है, क्योंकि अब यह सामान्य हो गया है। एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करना और उसे समय पर पूरा करना नए भारत की अब सामान्य बात है। जैसे एक न्यूरोसर्जन का काम कठिन होता है, लेकिन जैसे-जैसे वह विशेषज्ञता हासिल करता है, उसकी दक्षता बढ़ती जाती है। जैसे इसरो ने चंद्रमा के शिव शक्ति प्वाइंट पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। एक समय था, जब इसरो के लिए उपग्रह लॉन्च करना मुश्किल था, लेकिन अब इसरो ने इसमें इतनी विशेषज्ञता हासिल कर ली है कि अब वह सिर्फ चंद्रमा और मंगल ग्रह ही नहीं, बल्कि सूर्य तक भी पहुंच गया है। इसी तरह दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास बीआरओ के लिए एक आसान काम बन गया है।

बीआरओ ने अरुणाचल प्रदेश में बनाई गई नेचिफू सुरंग के उत्खनन कार्य के लिए आखिरी 'ब्रेक थ्रू ब्लास्ट' पिछले साल मई में किया था। यह सुरंग दोतरफा यातायात में आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। इस परियोजना की आधारशिला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ही 12 अक्टूबर 2020 को रखी थी। अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में बालीपारा-चार दुआर-तवांग (बीसीटी) रोड पर नेचिफू सुरंग 5,700 फीट की ऊंचाई पर बनाई गई है। यह 500 मीटर लंबी अंग्रेजी के अक्षर डी आकार की सिंगल ट्यूब डबल लेन सुरंग है। यह सुरंग दोतरफा यातायात को समायोजित करेगी और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा सुविधाओं से लैस होगी।

दरअसल, नेचिफू दर्रे के आसपास का मौसम अत्यधिक धुंधला रहता है, जिसकी वजह से कई दशकों से सामान्य यातायात और सैन्य काफिले को दिक्कत होती रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस सुरंग के निर्माण की योजना बनाई गई थी। इसलिए सुरंग में अत्याधुनिक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम लगाया गया है, जिसमें अग्निशामक उपकरण, ऑटो रोशनी प्रणाली और डेटा अधिग्रहण (स्काडा) नियंत्रित निगरानी प्रणाली शामिल हैं। सुरक्षित पैदल चलने वालों की आवाजाही के लिए सुरंग के दोनों तरफ फुटपाथ बनाये गए हैं, जिसके नीचे पावर केबल और ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई हैं।

नेचिफू सुरंग परियोजना के साथ उसी सड़क पर अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में ट्विन ट्यूब की एक और रणनीतिक सुरंग 'सेला टनल प्रोजेक्ट' अगले 20 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। यह 13 हजार फीट और उससे अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी द्वि-लेन सुरंग होगी। सेला सुरंग तवांग सेक्टर को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करके ‘जीवन रेखा’ की तरह होगी। दोनों सुरंगों के चालू होने के बाद सैन्य काफिले की सभी मौसमों में रणनीतिक रूप से सुरक्षित आवाजाही हो सकेगी। बीआरओ ने पिछले दो वर्षों में देश के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उच्च ऊंचाई पर पहाड़ी सुरंगों का निर्माण किया है। हिमाचल प्रदेश में अटल सुरंग, रोहतांग के अलावा उत्तराखंड में चंबा सुरंग पहले ही राष्ट्र को समर्पित की जा चुकी हैं।


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