नई दिल्ली/नूंह, 08 सितम्बर नूंह दंगों में क्षतिग्रस्त हुई 14 मस्जिदों में से आज तीन और मस्जिदों की मरम्मत का कार्य जमीअत उलमा-ए-हिंद के प्रयासों से पूरा हुआ। आज जुमे की नमाज के मौके पर जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने इन मस्जिदों का उद्घाटन किया।
शाही जामा मस्जिद सोहना के उद्घाटन अवसर पर जुमा की नमाज़ से पूर्व जमीअत उलमा संयुक्त पंजाब के उपाध्यक्ष मौलाना शेर मोहम्मद अमीनी ने जमीअत उलमा की सेवाओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। जुमे की नमाज इमाम मौलाना इमरान मोहम्मद कलीम काशिफी ने पढ़ाई। जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने जुमे की नमाज़ के बाद अपने मुख्य भाषण में कहा कि सांसारिक कष्ट हमारे ईमान की परीक्षा है, हमें धैर्य और दृढ़ता के साथ अल्लाह की ओर रुख करना चाहिए और निराशा से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान हमारी मातृभूमि है, अल्लाह तआला ने हमें यहां पैदा करके इस धरती को हमारे लिए चुना है, इसलिए इस देश के निर्माण और विकास में हमें हर प्रकार से भाग लेना है और इसे ऊंचाइयों पर ले जाना है। जो लोग हमें इस देश में किनारे करना चाहते है, वह कभी सफल नहीं हुए हैं, न ही होंगे और न कोई हमें हमारी मातृभूमि से अलग कर सकता है।
मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने उपस्थितजनों को सलाह दी कि वह अपनी नई पीढ़ी को ईमान, नैतिकता और ऊंचाइयों तक पहुंचने के उनके भीतर मौजूद कौशल की रक्षा करें, अगर आपने इसे बर्बाद कर दिया, तो न केवल आपका भविष्य, बल्कि पूरे समुदाय और देश का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह जमीअत उलमा-ए-हिंद के सौ वर्षीय इतिहास की महानता का प्रतीक है कि उसने कभी भी धर्म और संप्रदाय को देखकर अपनी नीति निर्धारित नहीं की, बल्कि इस्लाम का सिर ऊंचा रखने और मातृभूमि की रक्षा को अपना आदर्श बनाया।
इस मस्जिद के अलावा आज ईदगाह वाली मस्जिद होडल जिला पलवल का उद्घाटन जमीअत उलमा संयुक्त पंजाब के महासचिव मौलाना मोहम्मद याह्या करीमी ने किया, जिसके इमाम मौलाना मोहम्मद आबिद हैं, जबकि मुतवल्ली इदरीस पहलवान हैं। बाजार वाली मस्जिद होडल पलवल का उद्घाटन जमीअत उलमा मेवात के सचिव असलम बडीडवी ने किया। इस मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद उमर फारूक हैं, जबकि मुतवल्ली नवाबुद्दीन भाई हैं।
इस अवसर पर अपने वीडियो संदेश में मस्जिद ईदगाह वाली होडल के इमाम मौलाना मोहम्मद आबिद ने कहा कि केवल एक महीने के भीतर हमारी मस्जिद फिर से स्थापित हो गई और आज आधिकारिक रूप से जुमा की नमाज़ अदा की गई। बाजार वाली मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद उमर फारूक ने कहा कि आज शुक्रवार को जब मस्जिद के बड़े-बुज़ुर्ग यहां आए और नमाज़ शुरू हुई तो हम सबका दिल अल्लाह की बारगाह में कृतज्ञता से भर गया। जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव के साथ प्रतिनिधिमंडल में मुफ्ती सलीम साकरस, मास्टर कासिम महों और हाफिज़ यामीन सोहना भी शामिल थे।
