कहां है दिल्ली की 84,000 गुमशुदा लड़कियां? | The Voice TV

Quote :

"मेहनत का कोई विकल्प नहीं, बस मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ते रहो।"

National

कहां है दिल्ली की 84,000 गुमशुदा लड़कियां?

Date : 07-Aug-2023

 नई दिल्लीः जुलाई 2021 में दिल्ली के ओखला में रहने वाली एक 14 साल की लड़की घर से गायब हो गई और आज तक घर नहीं लौटी। उस बच्ची की तलाश में परिवार थक सा गया है। लड़की के भाई बताते हैं, हमें पड़ोस में रहने वाले 35-40 साल के एक आदमी पर शक था क्योंकि इस घटना से दो-ढाई महीने पहले भी मेरी बहन दो दिन के लिए उसी के साथ लापता हो गई थी। पूछताछ करके दिल्ली के ही एक इलाके से वो मिले और हमने पुलिस में शिकायत दी। वो गिरफ्तार हुआ, मगर फिर छूट गया। बहन उस वक्त 9वीं में पढ़ती थी, उसने बताया कि वह आदमी मोबाइल दिलाने का कहकर उसे ले गया था। इसके बाद जब वो गई तो कभी लौटकर वापस नहीं आयी। उसका मोबाइल आज भी बंद है, हम आज भी नंबर मिलाते रहते हैं। वो आदमी भी गायब है। हम थाने जाते हैं, वहां बैठे रहते हैं मगर पुलिस पता नहीं लगा पा रही। उलझी उदास आवाज में वह कहते हैं, कभी-कभी लगता है कि इतनी बड़ी दिल्ली है, शायद यहीं हो या फिर कहीं और? मैं बस यह जानता हूं कि वो कैसी है। वो बच्ची है, क्या किसी खतरे में तो नहीं होगी या किसी मुश्किल में? जिंदा होगी भी या…!

​परिवार के लिए मौत से ज्यादा दर्दनाक गुमशुदगी

गुमशुदगी का दर्द परिवार के लिए अपनों की मौत के दर्द से भी ज्यादा खतरनाक होता है। देश में तीन साल में 13.13 लाख लड़कियां और महिलाएं गायब हैं, दिल्ली से यह आंकड़ा 84 हजार है। यह कहना है केंद्र सरकार के आंकड़ों का, जो हाल ही में संसद में पेश किए गए। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआबी) के ये आंकड़े कहते हैं कि केंद्र शासित राज्यों में दिल्ली में सबसे ज्यादा 61,054 महिलाएं और 22,919 लड़कियां गुमशुदा हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली ट्रैफिकिंग का हब है, जहां देशभर से लड़कियां जिस्मफरोशी से लेकर बतौर हाउस हेल्प लायी जाती हैं। ट्रैफिकिंग को लेकर देश में सख्त कानून की कमी और गुमशुदा लोगों को ट्रेस करने में पुलिस का ढीला सिस्टम गुमशुदगी के मामलों में इजाफा कर रही है।

​‘दिल्ली से तस्करी के मामले कम, बाहर से ज्यादा’

दिल्ली पुलिस के आंकड़े कहते हैं कि दिल्ली से लड़कियों-महिलाओं की तस्करी के मामले बहुत कम हैं। एंट्री ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, क्राइम ब्रांच के मुताबिक, दिल्ली से ट्रैफिकिंग के मामले, जो सेक्शन 370 के तहत आते हैं, बहुत कम हैं। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में 80% से ज्यादा मामले बहला-फुसलाकर भगा ले जाना, प्रेम प्रसंग, घर में डांट-मारपीट, आर्थिक तंगी, शिक्षा की कमी है। इनमें से कई केस आगे चलकर हत्या, रेप, जैसे गंभीर अपराध के मामलों में भी बदलते हैं। मगर दिल्ली में देशभर से लड़कियां तस्करी करके लायी जाती हैं। 1 जनवरी से लेकर 30 जुलाई के बीच दिल्ली में एंट्री ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने 89 बच्चियां और लड़कियों को रेस्क्यू किया, जिसमें से 73 नाबालिग थीं।

गंभीरता से ट्रेस नहीं करती पुलिस’

पिछले साल नवंबर में 15 साल की लड़की साउथ ईस्ट दिल्ली से अचानक गायब हो गई। लड़की के इलेक्ट्रिशियन पिता बताते हैं, हम काम से घर से लौटे तो देखा बच्ची घर पर नहीं है। आस-पड़ोस हर जगह पूछा। रात हो गई, तो घबराहट और बढ़ी। हम थाने गए, शिकायत लिखी गई मगर कई दिन तक यही जवाब मिलता रहा कि ढूंढ रहे हैं। बच्ची जो मोबाइल ले गई थी, वो नंबर भी दिया था। फिर एनजीओ वालों के पास गया। उन्होंने उसी मोबाइल नंबर से बेटी को दो महीने में ढूंढ लिया। लड़की को एक आदमी यह कहकर ले गया कि उसे घुमाएगा और बल्लभगढ़ ले गया। वहां क्या हुआ, हम क्या बताएं! घर पर बस रोना-धोना था, कुछ दिन खाना भी नहीं पका। अब कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। इतना डर गए हैं कि लड़की को गांव उसकी दादी के पास भेज दिया है।

​पुलिस प्रेम प्रसंग मानकर FIR में करती है देरी

एंट्री-ट्रैफिकिंग पर काम करने वाली मिशन मुक्ति फाउंडेशन के डायरेक्टर वीरेंदर कुमार कहते हैं, सिस्टम में बड़ी खामी है। कोई लड़की गायब होती है तो एफआईआर दर्ज करने और जांच में तेजी नहीं होती, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नाबालिग के मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करनी है। सबसे पहले पुलिस उसे प्रेम प्रसंग मानकर चलती है और जांच के शुरुआती अहम घंटे मिस हो जाते हैं। अगर परिवार वाले बता भी रहे हैं कि वो कहां हो सकती है, तब भी कई मामलों में पुलिस दूसरे राज्य में जाकर ट्रेस नहीं करती। पुलिस स्टाफ की कमी, खर्चा वगैरह भी उन्हें रोकता है। एक केस में साउथ दिल्ली से 1 नवंबर 2022 को 15 साल की लड़की गायब हुई थी। तीन दिन तक पुलिस ने एफआईआर नहीं की। फिर जांच भी ढीली रही। परिवार ने एक बालिग लड़के पर शक करते हुए बताया भी था कि वो करनाल हो सकती है। 17 नवंबर को जब केस हमारे पास केस आया, हमने एनसीपीसीआर के जरिए हरियाणा पुलिस की मदद ली और लड़की को उसी लड़के के पास से रेस्क्यू किया मगर तब तक वो डेढ़ महीने की प्रेग्नेंट थी। अगर पुलिस तुरंत जांच शुरू करती, तो बच्ची को एबॉर्शन ट्रॉमा नहीं झेलना पड़ता। नौकरी और प्रेम के झांसे में लड़कियों को दूसरे राज्य ले जाकर बेच भी दिया जाता है, उनका संपर्क परिवार से टूट जाता है और वो गुमशुदा मान ली जाती हैं।

​कोविड के बाद बढ़े मामले

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रंस फाउंडेशन के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर राकेश सेंगर बताते हैं, मिसिंग बच्चियों के मामले में सोशल मीडिया का भी बड़ा रोल है। हमने देखा है कि मोबाइल पर गेम खेलते या सोशल मीडिया पर चैट करते लड़की से दोस्ती हुई, वो शख्स उसे भगा कर दूसरे राज्य में ले गया और फिर 25-30 हजार में उसे बेच दिया। कोविड के बाद ऐसे मामले बड़े हैं क्योंकि बच्चों के हाथ में मोबाइल आया है। इसके अलावा, ह्यूमन ट्रैफिकिंग का बड़ा सोर्स प्लेसमेंट एजेंसी भी हैं। लड़कियों को अगवा कर लिया जाता है और दूसरे राज्यों में बतौर मेड काम करवाया जाता है, बहुत काम लिया जाता है, ना पूरा खाना मिलता है, मारपीट-गालीगलौच और रेप भी आम है।

 

 

 नवभारत टाइम्स


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement