नई दिल्ली, 29 जनवरी । राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती भूमिका और प्रभाव के बीच संसद सदस्यों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे संसद और उसकी समितियों में रचनात्मक, सार्थक और प्रभावी योगदान दें।
संसद के बजट सत्र में गुरुवार को राज्यसभा के 270वें सत्र के शुभारंभ पर अपने संबोधन में सभापति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में संसद सदस्यों की भूमिका देश की आर्थिक दिशा तय करने में निर्णायक है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के दोनों सदनों के संयुक्त संबोधन ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की स्पष्ट रूपरेखा तय कर दी है और उसी के अनुरूप यह सदन अपने विधायी और विमर्शात्मक दायित्वों का निर्वहन करेगा। सभापति ने बताया कि 30 बैठकों के दौरान सदन में केंद्रीय बजट 2026-27 और सरकार के विधायी प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही अवकाश अवधि में विभागीय स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की गहन समीक्षा करेंगी।
राधाकृष्णन ने कहा कि बजट प्रस्तावों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी सदन में व्यापक कार्यवाही होनी है, जो जनप्रतिनिधियों की गंभीर जिम्मेदारी को दर्शाता है। उन्होंने सदस्यों से सदन के प्रत्येक निर्धारित मिनट का सदुपयोग करते हुए जनता की आकांक्षाओं को साकार करने का आह्वान किया।
सभापति ने संसदीय गरिमा, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र विविध विचारों और सशक्त बहस से फलता-फूलता है, लेकिन सम्मानजनक संवाद और रचनात्मक चर्चा ही संसदीय विमर्श का आधार होनी चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “अनुशासित और प्रबुद्ध लोकतंत्र दुनिया की सबसे उत्तम व्यवस्था है” और सदन में सदस्यों का आचरण इसी भावना को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
सभापति ने सभी संसदीय दलों के नेताओं और सदस्यों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा कि यह बजट सत्र एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होना चाहिए।
