तिरुनेलवेली, 29 जनवरी। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित मांचोलाई चाय बागान क्षेत्र में रह रहे श्रमिकों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है। चाय बागान में कार्यरत रहे श्रमिकों को सात दिनों के भीतर अपने आवास स्थायी रूप से खाली करने का निर्देश देते हुए संबंधित कंपनी द्वारा घर-घर नोटिस चिपकाए जाने से पूरे इलाके में भय और असमंजस का माहौल है।
दरअसल, जिले के कल्लिडैकुरिची के समीप मणिमुथारू क्षेत्र के घने वन इलाकों में स्थित मांचोलाई, नालुमुक्कु और ऊत्तु क्षेत्रों में चाय बागानों का संचालन कुछ वर्ष पहले बंद कर दिया गया था। इसके बाद यहां कार्यरत श्रमिकों की नौकरियां समाप्त हो गईं और उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। हालांकि, बागान बंद होने के बावजूद श्रमिक और उनके परिवार लंबे समय से उसी क्षेत्र में रह रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे सरकार से पहाड़ी क्षेत्र में ही निवास की अनुमति देने और वहीं आजीविका के साधन उपलब्ध कराने की मांग करते आ रहे हैं। इसी कारण वे पहाड़ों से नीचे स्थानांतरित होने से इनकार कर रहे हैं। दूसरी ओर, चाय बागान बंद होने और क्षेत्र को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किए जाने के चलते सरकार वहां मानव निवास बनाए रखने के पक्ष में नहीं है। इसी वजह से श्रमिकों को नीचे स्थानांतरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसको लेकर कई मामले न्यायालय में भी लंबित हैं।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले मदुरै उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मांचोलाई सहित चाय बागान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पेयजल, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसी बीच, बुधवार देर रात (28 जनवरी) बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीबीटीसीएल) ने मांचोलाई, ऊत्तु और नालुमुक्कु क्षेत्रों में प्रत्येक घर पर अचानक नोटिस चिपका दिए।
नोटिस में कहा गया है कि मांचोलाई और ऊत्तु क्षेत्रों सहित संबंधित भूमि को न्यायालय के आदेश के तहत 08 मई 2025 को तमिलनाडु सरकार के वन विभाग को सौंप दिया गया है। इन भूमियों पर स्थित कारखानों, आवासों, बंगलों और अन्य भवनों सहित पूरी भूमि को 31 दिसंबर 2025 तक या उससे पहले सरकार को सौंपना आवश्यक था, लेकिन परिस्थितियों के कारण तय समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
नोटिस में आगे कहा गया है कि अधिकारियों के दबाव के चलते अब बीबीटीसीएल कंपनी भवनों सहित भूमि सरकार को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। ऐसे में जिन श्रमिकों का सामान इन आवासों और भवनों में रखा हुआ है, उन्हें इस सूचना के जारी होने की तिथि से सात दिनों के भीतर अपना सामान हटाकर वहां से स्थायी रूप से खाली करना होगा।
न्यायालय से अपने पक्ष में फैसले की उम्मीद लगाए बैठे मांचोलाई के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए यह नोटिस गहरी चिंता का कारण बन गया है। अचानक मिले सात दिनों के अल्टीमेटम से लोग भयभीत हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। इलाके में तनाव का माहौल है और श्रमिक सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने तथा पुनर्वास को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।---
