शिमला, 19 जनवरी । हिमाचल प्रदेश में जनवरी की ठंड ने अपना असर और तेज़ कर दिया है। पहाड़ से लेकर मैदान तक शीतलहर का प्रकोप महसूस किया जा रहा है और मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन भी ठिठुरन से राहत नहीं मिलने वाली है। निचले ज़िलों बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, कांगड़ा और मंडी में कोल्ड वेव दर्ज की गई है, जबकि राजधानी शिमला का न्यूनतम तापमान भी गिरकर 3.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों में प्रदेश के औसत न्यूनतम तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है और यह सामान्य से 0.4 डिग्री नीचे बना हुआ है। सबसे ठंडे स्थानों की बात करें तो लाहौल-स्पीति का ताबो माइनस 7.1 डिग्री, कुकुमसेरी माइनस 4.0 डिग्री और कल्पा माइनस 2.4 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश के सबसे सर्द इलाकों में शामिल रहे। इसके अलावा रिकांगपिओ और नारकंडा में न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री, कुफरी में 1.8 डिग्री, भुंतर 1.5, सोलन 1.5, ऊना 2.0, हमीरपुर 2.5, मनाली 2.9, सुन्दरनगर 3.0, पालमपुर 3.0, धर्मशाला 3.2, चौपाल 3.3, कांगड़ा 3.4, शिमला 3.4, मंडी 3.6, बजौरा 3.7, जुब्बड़हट्टी 4.5, बिलासपुर 5.0, कसौली 6.0, सराहन 7.2, देहरा गोपीपुर 7.0, नाहन 8.8, पांवटा साहिब 9.0 और नेरी 9.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने साफ किया है कि पिछले 24 घंटों में राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में भी कहीं बर्फबारी नहीं हुई है और आज भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ बना हुआ है। राजधानी शिमला में सुबह से धूप खिली हुई है, वहीं मैदानी इलाकों में कोहरे का असर अपेक्षाकृत कम रहा। हालांकि, यह साफ मौसम ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मैदानी व मध्यपर्वतीय क्षेत्रों में अगले दो दिन मौसम में कोई बदलाव नहीं आएगा। इसके बाद 22 से 25 जनवरी के बीच प्रदेश भर में मौसम खराब रहेगा और 23 जनवरी को वेस्टर्न डिस्टरबेंस सबसे अधिक सक्रिय होगा। इसके चलते ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा की आशंका जताई गई है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
विभाग का कहना है कि इस सिस्टम के प्रभाव से लंबे समय से चला आ रहा ड्राई स्पेल टूटेगा, जो किसानों के लिए राहत की खबर हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि इस सर्दी में अब तक शिमला और मनाली में पहली बर्फबारी भी नहीं हो पाई है और शिमला से सटे प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुफरी और नारकंडा से भी बर्फ पूरी तरह गायब है। दूसरी ओर मैदानी क्षेत्रों में पिछले तीन महीनों से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं और गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
