गोरखपुर, 07 अक्टूबर । दिग्विजय नाथ महाविद्यालय में शनिवार को वायु सेना दिवस की पूर्व संध्या पर व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि भारत, सैनिक शक्ति के रूप में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। भारत अपनी वायु शक्ति के विकास पर तेजी से गतिशील है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने अपनी वायु सेना के स्वदेशीकरण पर काफी जोर देना शुरू किया है। इसी का परिणाम है कि आज मिग-21 के स्थान पर स्वेदशी वायुयान तेजस को वायु सेना में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने अपनी वायु सेना के बल पर 'न्यूक्लियर ट्रायड' जैसी शक्ति का विकास करने में सफलता पायी है। परमाणु बमों को अब जल, थल, वायु से प्रक्षेपित करने की क्षमता का विकास हो चुका है।
उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं अब भारत, नवीन तकनीकों को भी तेजी से विकसित कर रहा है। ड्रोन के विकास पर भी तेजी से काम हो है। इसका प्रदर्शन हमें वर्ष 2022 से गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देखने को मिल चुका है। भारत ने वायु के साथ अंतरिक्ष में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। वर्ष 2019 में ए-सैट मिसाइल का परीक्षण, वर्ष 2020 में अंतरिक्ष कमान का गठन, वर्ष 2023 में चन्द्रयान-3 मिशन तथा आदित्य एल-1 मिशन भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता को प्रदर्शित करता है। भारत वायु शक्ति से आगे बढ़कर अन्तरिक्ष क्षेत्र में भी अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयत्नशील है।
रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शुभ्रांशु शेखर सिंह ने कहा कि भारत की वायु शक्ति का प्रभाव है कि भारत ने एयर स्ट्राइक जैसी संक्रिया पाकिस्तान के विरूद्ध सम्पन्न की गयी। सर्जिकल स्ट्राइक की सैन्य संक्रिया में भी वायु सेना का सहयोग था। वायु शक्ति के रूप में ग्लोबल फायर के अनुसार भारत चौथे स्थान पर है। भारतीय वायु सेना स्वेदशीकरण की दिशा में बढ़ते हुए आधुनिक हो रही है।
संचालन रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग के प्रभारी डॉ. राम प्रसाद यादव ने किया तथा स्वागत एवं आभार ज्ञापन डॉ. विकास कुमार पाठक ने किया।
