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15 अक्टूबर विशेष:- साधारण व्यक्तित्व के धनी डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

Date : 15-Oct-2024

15 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व छात्र दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति और एक प्रेरक नेता डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती का सम्मान करता है, जिन्होंने अपना जीवन छात्रों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी डॉ. कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत है कि वह सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्ति नज़र आते हैं। वे एक ऐसे सर्वस्वीकार्य भारतीय हैं जो देश के सभी वर्गों के लिए 'एक आदर्श' हैं।

इतने महत्वपूर्ण व्यक्ति के बारे में कुछ कहना आसान नहीं है। उनकी वेशभूषा, बोलचाल का लहजा और अच्छे सरकारी आवास को छोड़कर हॉस्टल में बिताया गया सादगीपूर्ण जीवन, ये सभी बातें उनके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति पर गहरा प्रभाव डालती हैं। डॉ. कलाम एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी हैं। वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, देश के विकास और युवा मस्तिष्कों को प्रेरित करने में संलग्न हैं, साथ ही पर्यावरण की चिंता भी करते हैं। उन्हें साहित्य में रुचि है, वे कविता लिखते हैं, वीणा बजाते हैं, और अध्यात्म से गहरे जुड़े हुए हैं।

प्रारंभिक जीवन से मिसाइल मैन तक का सफ़र

उनका पूरा नाम ‘अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम’ था। काम के प्रति समर्पित, भारत रत्न, से सम्मानित और ‘भारत का मिसाइल मैन’ कहे जाने वाले मशहूर वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘जैनुलाब्दीन’ था, जो कि एक नाविक थे और उनकी माता का नाम ‘असीम्मा‘ था, जो एक गृहणी थी। डॉ. कलाम के पांच भाई-बहन थे।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया। बचपन से ही उन्हें सीखने की गहरी इच्छा थी। रामनाथपुरम, तमिलनाडु से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, डॉ. कलाम वर्ष 1955 में मद्रास चले गए, जहां उन्होंने ‘मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’, चेन्नई में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। क्या आप जानते हैं कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक लड़ाकू पायलट बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें ‘भारतीय वायु सेना’ (IAF) की प्रवेश परीक्षा में नौवां स्थान मिला। जबकि IAF ने केवल 8वीं रैंक तक के परिणाम की घोषणा की थी, इसलिए वे पायलट नहीं बन सके।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ‘रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन’ (DRDO) में वैज्ञानिक के रूप में शामिल हुए, जहां उन्होंने ‘हावरक्राफ्ट परियोजना’ पर कार्य किया। उन्होंने प्रसिद्ध वैज्ञानिक ‘विक्रम साराभाई’ के साथ भी कुछ समय तक काम किया। इसके बाद, वे वर्ष 1962 में ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) में आ गए, जहां प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लांच व्हीकल SLV-III के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस पहले सैटेलाइट व्हीकल ने भारत को वर्ष 1980 में रोहिणी सैटेलाइट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम बनाया। इस मिसाइल के निर्माण में डॉ. कलाम का अहम योगदान था, जिसके कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन’ की उपाधि मिली। इसके बाद, उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया और कई मिसाइलों का निर्माण किया।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की उपलब्धियां

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने जीवन में कई विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी भी कठिनाइयों के आगे हार नहीं मानी। यही कारण है कि उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्हें उनके कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनकी जानकारी नीचे दिए गए तालिका में दी गई है:

1981                                        पद्म भूषण

1990                                        पद्म विभूषण

1994                                        विशिष्ट शोधार्थी

1997                                        इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार

1997                                        भारत रत्न

1998                                        वीर सावरकर पुरस्कार

2000                                        रामानुजन पुरस्कार

2007                                        डॉक्टर ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नोलॉजी की मानद उपाधि

2007                                        किंग चार्ल्स II मेडल

2007                                        डॉक्टर ऑफ साइन्स की मानद उपाधि

2008                                        डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग (मानद उपाधि)

2008                                        डॉक्टर ऑफ साइन्स (मानद उपाधि)

2009                                        मानद डॉक्टरेट

2009                                        हूवर मेडल

2009                                        वॉन कार्मन विंग्स अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड

2010                                        डॉक्टर ऑफ इंजीनियरिंग

2011                                        आई.ई.ई.ई. मानद सदस्यता

2012                                        डॉक्टर ऑफ़ लॉज़ (मानद उपाधि)

2014                                        डॉक्टर ऑफ़ साइंस

 

देश का सर्वोच्‍च पद पर रहने के बाद भी डॉ. कलाम हमेशा अपना जीवन सादगी के साथ जीते रहे। उनका स्‍वभाव बेहद सहज, सरल और विनम्र था। वे हमेशा खुद को एक वैज्ञानिक और शिक्षक की तरह ही देखा करते थे। लेकिन 27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, (IIM) शिलांग में व्याख्यान देते समय हृदय गति रुकने से अचानक उनका निधन हो गया।

अब्दुल कलाम की जयंती पर उनके अनमोल वचन

·        आपका सपना सच हो, इससे पहले आपको सपना देखना होगा।

·        श्रेष्ठता एक सतत प्रक्रिया है, कोई हादसा नहीं।

·        छोटा लक्ष्य अपराध है, लक्ष्य बड़ा रखें।

·        जीवन एक मुश्किल खेल है। आप इंसान होने के अपने जन्मजात अधिकार को बरक़रार रखते हुए ही इसे जीत सकते है।

·        यदि आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलें।

·        जो लोग मन से काम नहीं कर सकते, उन्हें जो सफलता मिलती है वो खोखली और आधी-अधूरी होती है जिससे आसपास कड़वाहट फैलती है।

·        इंसान को मुश्किलों की जरूरत पड़ती है क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये मुश्किल बहुत ज़रूरी हैं।

·        आसमान की तरफ देखिए। हम अकेले नहीं हैं। पूरा ब्रह्मांड हमारा दोस्त है और वो उन्हीं को सबसे सर्वोत्तम देता है जो सपने देखते हैं, मेहनत करते हैं।

·        अपनी पहली जीत के बाद आराम न करें क्योंकि अगर आप दूसरी बार असफल हो गए तो और भी होंठ यह कहने के लिए इंतज़ार कर रहे होंगे कि आपकी पहली जीत सिर्फ किस्मत थी

·        आविष्कार करने का साहस दिखाएं, अंजाने रास्तों का सफ़र करें, असंभव लगने वाली चीजों को खोजें और समस्याओं पर विजय पाते हुए सफलता हासिल करें।


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