प्रेरणामूर्ति जगदेव राम उरांव
Date : 09-Oct-2024
9 अक्तूबर 1949 को तत्कालीन सेंट्रल प्रोविन्स एवं ब्ररार (मध्य प्रदेश वर्तमान में छत्तीसगढ़) के जशपुर के पास कोंमडो गांव के अघनू राम के परिवार में एक बालक का जन्म हुआ, नाम रखा गया जगदेव राम। जगदेवराम की पढ़ाई जशपुर नगर में हुई। हाईस्कूल की पढ़ाई के समय वह संघ के संपर्क में आए। 1968 में जगदेव राम वनवासी कल्याण आश्रम में आ गये। उनको शारीरिक शिक्षण ;च्ीलेपबंस म्कनबंजपवदद्धहेतु शिवपुरी भेजा गया। शिक्षा प्राप्ति के बाद जगदेव राम जी कल्याण आश्रम के विद्यालय में शारीरिक शिक्षक के रुप में काम करने लगे, आप संस्कृत के भी अच्छे शिक्षक थे। शिक्षक का कार्य करते हुए उन्होंने इतिहास में एम. ए. की पढ़ाई पूरी की। आपातकाल में 1975 में उनको रायगढ़ जेल में रखा गया। जेल से छूटने के पश्चात् जगदेवराम जी फिर कल्याण आश्रम के कार्य में जुट गए।
1978 में कल्याण आश्रम को अखिल भारतीय स्वरुप प्राप्त होने के पश्चात माननीय बाला साहब देशपांडे जगदेव राम जी के साथ में देश भर में भ्रमण करने लगे। असंग्रही वृत्ति के कारण प्रवास में दो जोड़ी कपड़े एवं संघ का गणवेश इतना ही सामान लेकर वह प्रवास करते थे। उनको संघभावना एवं स्वयंसेवकत्व का कभी भी विस्मरण नहीं हुआ। इस प्रकार 1994 तक देश के कोने-कोने तक उनका भ्रमण हुआ। सन 1993 उड़ीसा के कटक के अखिल भारतीय कार्यकर्ता सम्मेलन में बाला साहब ने जगदेव जी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में कार्य भार सौपा क्योंकि जिस समाज के लिए यह कार्य चल रहा है, उसी समाज का व्यक्ति संगठन का नेतृत्व करे यही बाला साहब जी की सोच थी।
राम जी ने यात्रा में कई कठिनाईयों का सामना किया है। एक बार झारसुगुडा से मुंबई की यात्रा करते समय बुखार था, बैठने हेतु सीट नहीं मिली अतः रेलवे के डब्बे में शौचालय के पास बैठकर अपनी यात्रा पूरी की। इस प्रकार परिश्रम के साथ उन्होंने कार्य किया।
श्रद्धेय बाला साहब जी की मृत्यु के पश्चात् 1995 में जगदेव राम जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उनके व्यक्तित्व को देख सबको विश्वास हो गया की बाला साहब जी का निर्णय सही है।
अध्यक्ष बनने के पश्चात सारे देश में प्रवास आरंभ हो गया। वह स्वयं जनजाति समाज के थे लेकिन अपने उरांव जाति के बारे में जितनी आत्मीयता, जानकारी थी, उतनी ही आत्मीयता अन्य जनजाति समाज के बारे में उनके मन में थी। अपनी जनजाति सेे उपर उठकर सभी जनजातियों के बारे में सोचने का स्वभाव था। साथ ही जनजाति अभिनिवेश उनके मन को कभी भी नहीं छू पाया। जगदेव राम जी जनजाति भाव से उपर उठकर हिंदू भाव से ओतप्रोत थे । यही उनकी विशेषता थी।
उनका चिंतन भी मूलगामी था और ज्ञान का भंडार अथाह था। सन् 2012 में प्दजमतदंजपवदंस ब्मदजतम वित ब्नसजनतंस ैजनकपमे ;प्ब्ब्ैद्धद्वाराप्दजमतदंजपवदंस ब्वदमितमदबम व िजीम म्सकमते व ि।दबपमदज ज्तंकपजपवदे सम्मेलन का आयोजन देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में किया गया था। उक्त कार्यक्रम में उन्हें विशेष आमंत्रित किया गया था। उस सम्मेलन में जगदेव राम जी को न्दपअमतेपजल व िॅवतसक ।दबपमदज ज्तंकपजपवदे - ब्नसजनतंस भ्मतपजंहमए न्ै। ने डाक्टरेट मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
उनको छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का आदिवासी सेवा सम्मान 2011 में तथा स्वर्गीय भाउराव देवरस सेवा सम्मान भी मिला, लखनऊ से उनके कार्य की प्रशंसा भी की गई। उनको अहंकार कभी नहीं छू सका। ऐसे आत्मविलोपी, सहज एवं सरल स्वभाव के धनी थे माननीय जगदेव राम जी।
देव राम जी अपने पास जो भी राशि थी वह सब कार्यकर्ताओं पर, पुस्तकों पर, मंदिरों में, मंदिरों के पुजारियों के लिए, पूजा पाठ में खर्च करते थे। आप निस्पृह व्यक्ति थे। विभिन्न ग्रंथों का सघन अध्ययन एवं प्रखर स्मरणशक्ति के कारण उनके भाषण ज्ञानवर्घक होते थे जिसे सुनना यह कार्यकर्ताओं के लिए सदैव प्रेरणादायी रहा।
एक विशेष बात जो सभी को आश्चर्यचकित की करेेगी कि अनेकों बार आप स्लीपर क्लास से ही रेलवे की यात्रा करते रहे। अति आग्रह करने पर कभी कभी ही वातानुकूलित कोच में यात्रा करते थे।
कष्ट सहना उनका स्वभाव था। अंत तक किसी को भी उन्होंने सेवा करने का मौका नहीं दिया। अपने परिवार में माता-पिता को कल्याण आश्रम के कार्य को दिखाया, समझाया और उनको कल्याण आश्रम के कार्य के अनुकूल किया। जगदेव राम जी ने आजीवन अविवाहित रहकर केवल वनवासी कल्याण आश्रम का कार्य किया, समाज की सेवा की।
जगदेव राम जी आध्यात्मिक नहीं थे पर आचरण में आप आध्यात्मिक व्यक्ति से कम नहीं थे। वे संत नहीं थे पर संत से कम नहीं थे, वे व्रत, उपवास नहीं करते थे पर व्रती थे, वे प्रचारक नहीं थे पर प्रचारक से कम नहीं थे, वे गृहस्थ नहीं थे पर करोड़ों परिवारों की गृहस्थी उनकी गृहस्थी थी, वे बाला साहब देशपांडे अथवा गहिरा गुरुजी तो नहीं थे परंतु उनके बताए मार्ग के वे सच्चे पथिक एवं एकनिष्ठ अनुयायी थे। ऐसे सपूत एवं सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्त्रोत आदरणीय जगदेव राम उरांव जी उनकी स्मृतियाँ सभी कार्यकर्ताओं कोे आने वाले समय में भी पथ प्रदर्शन करती रहेगी।