चाणक्य नीति:-साधु पुरुष | The Voice TV

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"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

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चाणक्य नीति:-साधु पुरुष

Date : 13-Dec-2023

 शैले  शैले न मणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे |

साधवो न हि सर्वत्र चन्दनं न वने वने ||

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि न प्रत्येक पर्वत  पर मणि-माणिक्य ही प्राप्त होते हैं न प्रत्येक हाथी के मस्तक से मुक्ता-मणि प्राप्त होती है | संसार में मनुष्यों की कमी न होने पर भी साधु पुरुष सब जगह नहीं मिलते | इसी प्रकार सभी वनों में चन्दन के वृक्ष उपलब्ध नहीं होते |

यहां अभिप्राय यह है कि अनेक पर्वतों पर मणि-माणिक्य मिलते हैं, परन्तु सभी पर्वतों पर नहीं | ऐसा विश्वास किया जाता है कि कुछ हाथी ऐसे होते हैं  जिनके मस्तक में मणि विद्यमान रहती है, परन्तु  ऐसा सभी  हाथियों में नहीं होता | इसी प्रकार इस पृथ्वी पर पर्वतों और जंगलों अथवा वनों की कमी नहीं, परन्तु सभी वनों में चन्दन नहीं मिलता | इसी प्रकार सभी जगह साधु व्यक्ति नहीं दिखाई देते |

साधु शब्द से आचार्य  चाणक्य का अभिप्राय यहां सज्जन व्यक्ति से है | अर्थात् ऐसा व्यक्ति जो दूसरों के बिगड़े हुए काम को बनता हो, जो अपने मन को निवृत्ति की ओर ले जाता हो और निःस्वार्थ भाव से समाज-कल्याण की इच्छा करता हो | साधु का अर्थ यहां  केवल भगवे कपड़े पहनने वाले दिखावटी सन्यासी व्यक्ति से नहीं है | यहां इसका भाव आदर्श समाजसेवी व्यक्ति से है, परन्तु ऐसे आदर्श व्यक्ति सब जगह कहां मिलते हैं ! वे तो दुर्लभ ही हैं | जहां भी मिले उनका यथावत आदर-सम्मान ही करना चाहिए |

 

 


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