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इंदौर-बुधनी रेल लाइन से बदलेगा मध्य प्रदेश का रेल नक्शा, आरवीएनएल ने पहाड़ चीरकर रचा इतिहास

Date : 14-Jan-2026

 देवास/ कन्नौद, 14 जनवरी । मध्य प्रदेश के रेल मानचित्र को नया आकार देने वाली बहुप्रतीक्षित इंदौर–बुधनी नई रेल लाइन परियोजना ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की टनल-2 में पहली 100 मीटर खुदाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। खास बात यह है कि यह उपलब्धि बेहद कठिन और कमजोर भू-स्थितियों में महज दो महीनों के भीतर प्राप्त की गई है, जिसे इंजीनियरिंग कौशल और आधुनिक तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

इंदौर-बुधनी रेल लाइन परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर और जबलपुर के बीच की रेल दूरी लगभग 150 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इससे मध्य प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच सीधा, तेज और अधिक प्रभावी रेल संपर्क स्थापित होगा। यह परियोजना यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाएगी, साथ में माल परिवहन के लिए भी एक नया और सशक्त कॉरिडोर साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चालू होते ही प्रदेश में रेल यातायात की दिशा और दशा दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

सबसे कठिन पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण

टनल-2 का निर्माण ऐसे पहाड़ी क्षेत्र में किया जा रहा है, जहां भू-गर्भीय परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। यह सुरंग रॉक क्लास-वी श्रेणी की चट्टानों में बनाई जा रही है, जिसे सुरंग निर्माण के लिहाज से सबसे कठिन श्रेणी माना जाता है। इस क्षेत्र में कमजोर चट्टानें, लगातार जल रिसाव और भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा सुरंग के ठीक ऊपर से दो सक्रिय नाले गुजरते हैं, जिससे खुदाई कार्य और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाता है।

आरवीएनएल अधिकारियों के अनुसार, इन जटिल परिस्थितियों के बावजूद उन्नत खुदाई तकनीक, रियल-टाइम जियो-टेक्निकल मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा मानकों के कारण यह लक्ष्य सुरक्षित और सफलतापूर्वक हासिल किया गया। खुदाई के तुरंत बाद प्राथमिक सपोर्ट सिस्टम लगाया गया, ताकि सुरंग की संरचनात्मक स्थिरता बनी रहे और भविष्य के कार्य निर्बाध रूप से आगे बढ़ सकें।

माल और यात्री यातायात को मिलेगा बड़ा लाभ

इंदौर–बुधनी रेल लाइन के पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश को एक नया वैकल्पिक रेल मार्ग मिलेगा, जो उत्तर–दक्षिण रेल नेटवर्क को और अधिक मजबूत करेगा। इससे मौजूदा रेल मार्गों पर दबाव कम होगा और ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम हो सकेगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह लाइन माल परिवहन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

इंदौर, देवास, हरदा, खंडवा, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और जबलपुर जैसे औद्योगिक, कृषि और खनिज उत्पादन वाले क्षेत्रों को इस रेल लाइन से सीधा लाभ मिलेगा। कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और खनिजों का परिवहन तेज और कम लागत में हो सकेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

इस परियोजना का असर केवल रेल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिलेगा। निर्माण चरण के दौरान स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है। वहीं परियोजना के पूर्ण होने के बाद पर्यटन, व्यापार और छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान होगी। इससे इन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी और पलायन की समस्या में भी कमी आने की संभावना है।

इंजीनियरिंग क्षमता का मजबूत उदाहरण

आरवीएनएल के प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने टनल-2 की पहली 100 मीटर खुदाई पूरी होने को कंपनी की इंजीनियरिंग क्षमता और परियोजना प्रबंधन दक्षता का मजबूत उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, साथ में आगे के कार्यों के लिए भी एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

जनप्रतिनिधियों ने बताया मील का पत्थर

कन्नौद–खातेगांव विधानसभा के विधायक आशीष शर्मा ने इस परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि इंदौर–बुधनी रेल लाइन क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आएगी और पर्यटन एवं उद्योगों के विकास के नए आयाम स्थापित करेगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूरे अंचल की तस्वीर बदलने वाली साबित होगी।


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