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अंग्रेजी गैगेरियन कैलेण्डर 2025 नहीं केवल 444 वर्ष पुराना, भारत में 273 वर्ष पहले लागू हुआ

Date : 31-Dec-2025

रमेश शर्मा

एक जनवरी से नया साल आरंभ हो रहा है। पूरी दुनियाँ वर्ष 2026 में प्रवेश करेगी। यह अंग्रेजी कैलेण्डर 2025 वर्ष पुराना नहीं है, केवल 444 वर्ष पुराना है और भारत में 273 वर्ष पहले लागू हुआ था। दुनियाँ में काल गणना का इतिहास बहुत उतार-चढ़ाव से भरा है। विभिन्न देशों में अपने-अपने पुराने कैलेण्डर हैं। बीस से अधिक कैलेण्डरों का इतिहास उपलब्ध है। जिस अंग्रेजी कैलेंडर को आज की दुनियाँ में सबसे अधिक मान्यता है उसे "ग्रेगेरियन कैलेण्डर" कहा जाता है।

इस कैलेण्डर के अनुसार संसार वर्ष 2026 में प्रवेश करने जा रहा है लेकिन यह कैलेण्डर इतना पुराना नहीं है। इसे आरंभ करने वाले पोप ग्रैगरी अष्टम थे। उनके नाम पर ही इस कैलेण्डर का नाम "ग्रेगोरियन कैलेण्डर" कहलाता है। यह कैलेण्डर 1582 ईस्वी में लागू हुआ था। अंग्रेजों ने भारत में इस कैलेण्डर को 1753 में लागू किया था। अंग्रेजों ने आरंभ में इस कैलेण्डर को शासन व्यवस्था में लागू किया था और धीरे-धीरे समाज में घोला। अब पूरे भारत की जीवनचर्या इसी कैलेण्डर से संचालित होती है।

कैलेण्डर का इतिहास

आज भारत की आधुनिक पीढ़ी भले अपना अतीत भूल गयी हो पर यह गर्व की बात है कि यूरोप को काल गणना से परिचित कराने वाले भारतीय शोधकर्ता ही रहे हैं। यूरोप के प्राचीन इतिहास में वर्णन मिलता है कि दो सौ नावों से आर्यों का एक दल यूरोप गया था जिसने रोम की स्थापना की थी वे अपने साथ समय की गणना पद्धति लेकर गये थे। दूसरा विवरण सुप्रसिद्ध यूनानी सम्राट सिकन्दर के समय का है। सिकन्दर आक्रमणकारी के रूप में भारत आया था और भारत से लौटते समय विभिन्न विषय के विद्वानों का दल अपने साथ ले गया था। उनमें पंचांग पद्धति विशेषज्ञ भी थे। इन विशेषज्ञों ने यूरोप जाकर यूरोपीय काल गणना पद्धति में संशोधन किये और जूलियन कैलेण्डर आरंभ किया। फिर पोप ग्रेगरी अष्टम ने 1582 में कुछ संशोधन किये और वर्तमान कैलेण्डर का यह स्वरूप सामने आया। पोप ग्रेगरी अष्टम ने ईसा मसीह की अनुमानित जन्मतिथि की गणना करके 1582 वर्ष पूर्व की तिथि 1 जनवरी निर्धारित की और इसी तिथि से कैलेण्डर आरंभ किया।

ईसा मसीह की अनुमानित जन्मतिथि से लागू करने के कारण इसे "ईस्वी सन्" कहा गया और इस कैलेण्डर को पोप ग्रेगरी के नाम पर "गेग्रेरियन कैलेण्डर" नाम दिया। अंग्रेज जिस देश में व्यापार करने गये, शासक बने, उन्होने अपनी परंपराएँ लागू कीं और यह ग्रेगेरियन ईस्वी सन् कैलेण्डर पद्धति भी। अंग्रेज अपनी जड़ों और परंपराओं से इतने गहरे जुड़े रहे कि उन्होंने पूरी दुनियाँ को अपने ही परिवेश में ढाला। पता नहीं अंग्रेजों के पास क्या जादू था कि दुनिया से उनके शासन का अंत भले हो गया हो पर उनके द्वारा शासित रहे अधिकांश देश आज भी अंग्रेजी परंपराएँ और उनके इस ग्रेगोरियन कैलेंडर से ही अपनी सरकार और समाज चलाते हैं। कुछ देशों में भीतर अपनी निजी काल गणना पद्धति प्रचलित तो है, पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी दुनियाँ अंग्रेजी महीनों और तिथियों के अनुसार ही संचालित होती है ।

शब्द "कैलेण्डर" की यात्रा

ग्रेगोरियन कैलेण्डर उपयोग किये गये महीनों और दिनों के नाम भी अंग्रेजों के अपने नहीं हैं। वे दुनियाँ की विभिन्न भाषाओं से लेकर रूपान्तरित किये गये है। सबसे पहले इसका नाम "कैलेण्डर" ही देखें। कैलेण्डर शब्द अंग्रेजी भाषा का नहीं है, लैटिन भाषा का है। लैटिन भाषा में "कैलेण्ड" शब्द का अर्थ हिसाब-किताब होता है। उधर, चीन में "केलैण्ड" का अर्थ चिल्लाना होता है। वहाँ ढोल बजाकर तिथि, दिन और समय की सूचना दी जाती थी। इस तरह कैलेण्ड शब्द से इस पद्धति का नाम कैलेण्डर पड़ा। इसे संसार में अलग-अलग देशों में अलग-अलग तिथियों में लागू किया गया।

यह ग्रेगोरियन कैलेंडर इटली, फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल ने सन् 1582 ईस्वी में, परशिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, हॉलैंड और फ़्लैंडर्स ने 1583 ईस्वी में, पोलैंड ने 1586 ईस्वी में, हंगरी ने 1587 ईस्वी में, जर्मनी, नीदरलैंड, डेनमार्क ने 1700 ईस्वी में, ब्रिटेन और उनके द्वारा शासित लगभग सभी देशों में 1752 ईस्वी, जापान ने 1972 ईस्वी, चीन ने 1912 ईस्वी, बुल्गारिया ने 1915 ईस्वी, तुर्की और सोवियत रूस ने 1917 ईस्वी, युगोस्लाविया और रोमानिया ने 1919 ईस्वी में लागू हुआ।

यूरोप में कैलेण्डर की शुरुआत

यूरोपियन कैलेण्डर का आरंभ रोम से हुआ था। इसे आरंभ करने वाले रोमन सम्राट जूलियन सीजर थे। इसलिये उसका पुराना जूलियन कैलेण्डर था। उन्होंने पूर्व से प्रचलित कैलेण्डर में कुछ परिवर्तन किये थे जो उनसे पूर्व राजा न्यूमा पोपेलियस ने आरंभ किया था। तब इसमें केवल दस माह और 354 दिन ही हुआ करते थे। कहते हैं शोधकर्ता तो बारह मास का ही कैलेण्डर तैयार करना चाहते थे पर राजा बारह माह का कैलेण्डर बनाने तैयार न हुआ था। राजा की जिद के चलते बारह के बजाय दस माह का कैलेण्डर तैयार हुआ था। बाद में जूलियट सीजर ने उस कैलेण्डर में परिवर्तन करने के आदेश दिये और तब यह कैलेण्डर बारह महीने का तैयार हुआ।

अब कुछ विद्वानों का मत है कि इसमें ईसा मसीह की जन्मतिथि में चार वर्ष का अंतर आ गया है। इसमें समय के साथ अनेक परिवर्तन हुये। जब यह कैलेण्डर आरंभ हुआ था तब इसमें लीप इयर या हर चौथे साल फरवरी 29 दिनों का प्रावधान नहीं था। यह प्रावधान खगोल अनुसंधान के बाद अमेरिकी वैज्ञानिकों ने सूर्य और पृथ्वी परिक्रमा की गणना करके जोड़ा। जबकि भारत में पाँच हजार वर्ष पुरानी गणना भी बारह माह की थी। जो ऋतु परिवर्तन का अध्ययन करके निर्धारित किया गया था। भारत में इसे कैलेण्डर नहीं "पंचांग" कहा जाता है।

शब्द "पंचांग" भी गहन अर्थ लिए हुए है। पंचांग अर्थात पाँच अंग। भारतीय पंचांग में कुल पाँच आधार होते हैं। ये तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण हैं। इन पाँच अंगों से ही भारतीय पंचांग में तिथि दिन की गणना होती है जबकि वर्ष और माह की जानकारी इन पाँच अंगों से अलग होती है। जबकि ग्रेगोरियन कैलेण्डर में केवल दो जानकारी होती है। तारीख और दिन की। माह और वर्ष भी। इस प्रकार पाँच हजार वर्ष पुरानी भारतीय कालगणना पद्धति "पंचांग" पश्चिम की आधुनिक कैलेण्डर पद्धति से अपेक्षाकृत अधिक उन्नत रही है।

(लेखक, वरिष्‍ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)


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