प्रेरक प्रसंग अध्याय 10 :सेवा और पावनता | | The Voice TV

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"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

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प्रेरक प्रसंग अध्याय 10 :सेवा और पावनता |

Date : 12-Dec-2023

 दशम सिख गुरु गोविंदसिंहजी आनन्दपुर साहिब में विराजमान थे | उन्हें तृषा का अनुभव हुआ, तो बोले, “कोई मुझे पवित्र हाथों से जल पिलाये |’’ एक संभ्रान्त व्यक्ति उठा और जल ले आया | जलपात्र लेते समय गुरूजी का स्पर्श उस व्यक्ति के हाथ से हो गया | वे पूछ बैठे, “तुम्हारे हाथ इतने कोमल क्यों है ?’’ वह अपनी प्रशंसा समझ फूला समाया | बोला, “गुरूजी, मेरे अनेक सेवक हैं | मैं स्वयं कोई कार्य नहीं किया करता, इसलिए मेरे हाथ इतने कोमल हैं |’’

गुरूजी ने अंधेरों तक लाये हुए जलपात्र को नीचे रख दिया और वे गम्भीर स्वर में बोले, “जिन हाथों ने कभी सेवा ही की, वे पवित्र कैसे, हुए ? पवित्रता तो सेवा से ही प्राप्त होती है | मैं तुम्हारे हाथ का जल ग्रहण नहीं कर सकता |’’

वह व्यक्ति शर्मिन्दा हो गया और उसने गुरूजी को वचन दिया कि वह केवल अपने कार्य स्वयं किया करेगा, वरन अब दूसरों की सेवा भी किया करेगा |

 


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