भारत में देखा जाए तो बहुत से ऐसे मंदिर है जो रहस्यों से भरा है | ऐसा ही एक मंदिर है राजस्थान में स्थित मेहंदीपुर में एक हिन्दू मंदिर है जो भगवान हनुमान को समर्पित है | मंदिर में स्थित तीन देवताओं का मुख्य रूप से पूजे जाते है | हनुमानजी(बालाजी) प्रेत राज और भैरव इन सभी देवताओ का संबंध भुत प्रेतों से माना जाता है | मंदिर से जुड़ी किंवदंती एक दैवीय शक्ति की बात करती है और ऐसा माना जाता है कि जिस मूर्ति की यहां पूजा की जाती है वह स्वयं प्रकट हुई थी।
मेंहदीपुर बालाजी मंदिर - हिन्दू देवता जिन्हें संकट मोचन माना जाता है यानि संकट को नाश करने वाला बल के देवता के लिए समर्पित है दक्षिण भारत में बालाजी का तात्पर्य भगवान वेंकटेश से है, जो तिरूपति बालाजी मंदिर के कारण प्रसिद्ध हैं, वे मूल रूप से भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। भगवान हनुमान भगवान शिव के अवतार हैं, जिन्होंने त्रेता युग में भगवान विष्णु के एक अवतार भगवान राम की सेवा की थी।
महत्व: मेहंदीपुर मंदिर को महाभारत काल के युद्ध से सम्बंधित कथा में प्रमुख भूमिका दी गई है| हनुमान जी ने महाभारत के द्वापर युग में लक्ष्मण की रक्षा के लिए युद्ध किया था| इसी कारण से मेहंदीपुर मंदिर में हनुमान जी को "मेहंदीपुर वाले बालाजी" के नाम से भी जाना जाता है|
मंदिर का इतिहास
बालाजी मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कहानी है | इस मंदिर ने तीन देवता 1000 साल से विराजमान है | कहा जाता है कि अरावली पहाड़ियों के बीच हनुमानजी के मूर्ति अपने आप बनी हुई है | इस प्रतिमा किसी साहूकार द्वारा नहीं बनाया गया है | और कहा जाता है कि मंदिर के एक पुराने महंत को एक सपना आया था उन्होंने स्वप्न में देवताओं को देखा था उन्हें अपने कर्तव्य के लिए तत्पर रहने का आदेश देते हुए आवाज सुनाई दी। अचानक, भगवान बालाजी उनके सामने प्रकट हुए और आदेश दिया: मेरी सेवा करने का कर्तव्य अपनाओ | जिसके बाद से यहां भगवान हनुमान की पूजा अर्चना शुरू कर दी गई और फिर बाद में तीन देवता वहां स्थापित हो गए |
वहां वातावरण को महसूस किया जा सकता है –
मंदिर में जाने के बाद लोगों ने अपने आस-पास के अलगही वातावरण को महसूस किया है | देखा जाएं तो यहाँ गांव में गर्म वातावरण में स्थित है | लेकिन कहा जाता है की वहा जाने के बाद ठंडका एहसास होता है |और यहाँ बाकी मंदिरों कि तरह यहाँ घंटी कि आवाज सुने नहीं देगी पर यहाँ कुछ लोगो की चिल्लाने कि आवाज़ सुनाई देगी |
कभी वापस नहीं मुड़कर देखना चाहिए
मान्यता के अनुसार- जब भी यहां से जाने के लिए तैयार हों तो याद रखें कि आप कोई भी खाने की चीज जैसे प्रसाद या पानी की एक बूंद भी वापस न लेकर आएं| यहां लोगों से बात नहीं की जाती और उन्हें छुआ भी नहीं जाता है| क्योंकि ऐसा माना जाता है कि बहुत से लोगों में प्रेत होते हैं जिनसे आप भी प्रभावित हो सकते हैं|
