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भारत ने मल्टी-बैरल पिनाका रॉकेट की पहली खेप मित्र देश आर्मेनिया को भेजी

Date : 10-Oct-2023

 नई दिल्ली, 10 अक्टूबर । भारत ने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (एमबीआरएल) रॉकेट की पहली खेप मित्र देश आर्मेनिया को भेज दी है। ऑर्डिनेंस फैक्टरी अम्बाझरी से रवाना की गई इस खेप के बारे में यह खुलासा नहीं किया गया है कि यह किस देश को भेजी गई है लेकिन भारत से पिनाका रॉकेट खरीदने वाला पहला देश आर्मेनिया ही है, जिसने पिछले साल सितंबर में 245 मिलियन डॉलर का ऑर्डर दिया था।

ऑर्डिनेंस फैक्टरी, अम्बाझरी (ओएफएजे) के प्रवक्ता ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर बताया कि पिनाका रॉकेट के लिए ओएफएजे ने वैश्विक मंच पर सफलतापूर्वक अपनी पहचान बनाई है। फैक्टरी के वरिष्ठ महाप्रबंधक सोमनाथ त्रिपाठी ने सभी हितधारकों की मौजूदगी में 05 अक्टूबर को निर्यात के लिए पिनाका एमके-I संवर्धित रॉकेट की पहली खेप हरी झंडी दिखाकर रवाना की है। यह उपलब्धि हमारी शिल्प कौशल और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है और हम अपने राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, पोस्ट में यह उल्लेख नहीं किया गया कि किस देश को रॉकेट की पहली खेप भेजी गई है, लेकिन यह संभवतः आर्मेनिया देश है। पिछले साल सितंबर में आर्मेनिया ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित पिनाका लॉन्चर, रॉकेट और संबंधित उपकरणों के लिए 245 मिलियन डॉलर का ऑर्डर दिया था। इस हथियार प्रणाली के लिए किसी देश से मिला यह भी पहला निर्यात ऑर्डर था। यह पिनाका एमके-1 ईआर रॉकेट लगभग 45 किलोमीटर की दूरी तक जमीन के लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। इससे भी लंबी दूरी का रॉकेट पिनाका एमके-2 ईआर अभी विकास के अधीन है, जिससे 120 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर लक्ष्य को हिट किया जा सकेगा।

अपने पड़ोसी अजरबैजान से आत्मरक्षा में लगा आर्मेनिया तेजी के साथ सैन्य हथियार जुटा रहा है। भारत से पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर खरीदने के बाद मित्र देश आर्मेनिया ने भारतीय रक्षा कंपनी कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड को माउंटेड आर्टिलरी गन की चार से पांच रेजिमेंट के लिए ऑर्डर किया है। इस हथियार प्रणाली के लिए किसी देश से मिला यह भी पहला निर्यात ऑर्डर है। यह पहली बार नहीं है जब आर्मेनिया को भारत से हथियार प्रणालियों का निर्यात किया जा रहा है। इससे पहले भारत ने 2020 में 350 करोड़ रुपये का सौदा हासिल करके दुश्मन के खतरनाक हथियारों को खोजने में माहिर चार स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार (डब्ल्यूएलआर) की आपूर्ति आर्मेनिया को की थी।


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