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बड़े देश स्वार्थ छोड़कर, स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाएं : मोदी

Date : 02-Dec-2023

 दुबई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक समुदाय का आह्वान किया कि जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उन्हें स्वार्थ प्रेरित सोच के अंधेरे से बाहर निकलना होगा और ऊर्जा संक्रमण, न्यायपूर्ण, समावेशी एवं समानतापूर्ण बनाने के लिए दूसरे देशों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुलभ करके स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाना होगा।

श्री मोदी ने यहां संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अध्यक्षता में आयोजित विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन (सीओपी-28) में विशेष संबोधन में इस आह्वान के साथ ग्रीन क्रेडिट पहल की घोषणा की और सभी देशों से इससे जुड़ने की अपील भी की। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरस भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री ने विश्व नेताओं को दो टूक शब्दों में नसीहत देते हुए कहा, पिछली शताब्दी की गलतियों को सुधारने के लिए हमारे पास बहुत ज्यादा समय नहीं है। मानव जाति के एक छोटे हिस्से ने प्रकृति का अंधाधुंध दोहन किया। लेकिन इसकी कीमत पूरी मानवता विशेषकर ग्लोबल साउथ के निवासियों को चुकानी पड़ रही है।

सिर्फ मेरा भला हो, ये सोच, दुनिया को एक अंधेरे की तरफ ले जाएगी। इस हॉल में बैठा प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक राष्ट्राध्यक्ष बहुत बड़ी जिम्मेदारी के साथ यहां आया है। हम में से सभी को अपने दायित्व निभाने ही होंगे। पूरी दुनिया आज हमें देख रही है, इस धरती का भविष्य हमें देख रहा है। हमें सफल होना ही होगा।

श्री मोदी ने कहा, हमें निर्णायक होना होगा। हमें संकल्प लेना होगा कि हर देश अपने लिए जो जलवायु लक्ष्य तय कर रहा है, जो संकल्प कर रहा है, वो पूरा करके ही दिखाएगा। हमें एकता से काम करना होगा। हमें संकल्प लेना होगा कि हम मिलकर काम करेंगे, एक दूसरे का सहयोग करेंगे, साथ देंगे। हमें वैश्विक कार्बन बजट में सभी विकासशील देशों को उचित शेयर देना होगा।

हमें अधिक संतुलित होना होगा। हमें ये संकल्प लेना होगा कि अनुकूलन, शमन, जलवायु वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी, हानि और क्षति इन सब पर संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ें। हमें महत्वाकांक्षी हाेना होगा। हमें संकल्प लेना होगा कि ऊर्जा संक्रमण, न्यायपूर्ण, समावेशी एवं समानतापूर्ण हो। हमें नवान्वेषी बनना होगा। हमें ये संकल्प लेना होगा कि नवान्वेषी तकनीक का लगातार विकास करें। अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरे देशों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करें। स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त करें।

 

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