भारत के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो समय और परिस्थितियों की सीमाओं से परे चले जाते हैं। महात्मा गांधी उन्हीं में से एक हैं। वे केवल स्वतंत्रता आंदोलन के नेता नहीं थे, बल्कि एक ऐसी विचारधारा थे जिसने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को सत्य, अहिंसा और मानवता का मार्ग दिखाया। उनकी पुण्यतिथि हमें उनके निधन का शोक मनाने से अधिक, उनके विचारों को स्मरण करने और उन्हें अपने जीवन में उतारने का अवसर देती है।
महात्मा गांधी को भारत का राष्ट्रपिता कहा जाता है, लेकिन आम जनमानस उन्हें प्रेम और अपनत्व से “बापू” कहता है। यह संबोधन उनके और जनता के बीच के गहरे भावनात्मक संबंध को दर्शाता है। वे सत्ता के केंद्र में बैठने वाले शासक नहीं थे, बल्कि आम लोगों के सुख-दुख को समझने वाले मार्गदर्शक थे। उनका संपूर्ण जीवन लोगों के बीच, लोगों के लिए और लोगों के साथ बीता।
गांधी जी का जीवन सादगी, संयम और आत्मअनुशासन का प्रतीक था। उन्होंने दिखावे और भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर रहकर यह सिद्ध किया कि वास्तविक शक्ति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि नैतिक बल में निहित होती है। उनका पहनावा, खान-पान और जीवनशैली अत्यंत सरल थी, किंतु उनके विचार अत्यंत गहरे और प्रभावशाली थे। यही कारण था कि समाज के हर वर्ग के लोग उनसे सहज रूप से जुड़ाव महसूस करते थे।
पुण्यतिथि का दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि कोई भी देश केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं बनता, बल्कि मजबूत नैतिक मूल्यों से सशक्त होता है। गांधी जी का मानना था कि स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब समाज में समानता, न्याय और मानवीय गरिमा हो। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को हिंसा के मार्ग से नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा की नैतिक शक्ति से आगे बढ़ाया। यह उस समय एक साहसिक और अनोखा प्रयोग था, जिसने दुनिया को संघर्ष और परिवर्तन का एक नया रास्ता दिखाया।
आज के दौर में, जब समाज में असहिष्णुता, टकराव और वैचारिक विभाजन बढ़ता दिखाई देता है, गांधी जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। वे सिखाते हैं कि असहमति को भी शांति, संयम और सम्मान के साथ व्यक्त किया जा सकता है। उनका स्पष्ट संदेश था कि नफरत से नफरत नहीं मिटती, बल्कि प्रेम, संवाद और समझ से ही समाज आगे बढ़ता है।
महात्मा गांधी समाज के हर वर्ग के कल्याण को लेकर चिंतित रहते थे। उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए निरंतर आवाज़ उठाई। उनके लिए राष्ट्र निर्माण का अर्थ था समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सम्मान पहुँचाना। वे मानते थे कि जब तक सबसे कमजोर व्यक्ति सशक्त नहीं होगा, तब तक राष्ट्र वास्तविक रूप से मजबूत नहीं बन सकता।
गांधी जी का स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने लोगों को अपने श्रम का सम्मान करना सिखाया और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। चरखा उनके लिए केवल एक साधारण उपकरण नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान, स्वावलंबन और आत्मबल का प्रतीक था। वे मानते थे कि जब नागरिक अपने कर्तव्यों को समझते और निभाते हैं, तभी राष्ट्र प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है।
अपने जीवन में गांधी जी को अनेक बार आलोचना, विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने जेल यात्राएँ कीं, अपमान सहे, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यही दृढ़ता उन्हें एक साधारण नेता से महान व्यक्तित्व बनाती है। उनका विश्वास था कि सही मार्ग कठिन अवश्य होता है, किंतु वही स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। यह दिन हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता और करुणा को कितना स्थान दे रहे हैं। क्या हम समाज में शांति और संवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, या टकराव और विभाजन को?
युवा पीढ़ी के लिए गांधी जी के विचार विशेष महत्व रखते हैं। तेज़ प्रतिस्पर्धा, मानसिक तनाव और अनिश्चितता के इस दौर में उनका जीवन संतुलन, धैर्य और आत्मविश्वास का मार्ग दिखाता है। वे यह सिखाते हैं कि सफलता केवल पद, पैसा या प्रसिद्धि से नहीं मापी जाती, बल्कि एक अच्छा और जिम्मेदार इंसान बनने से मिलती है।
आज भी दुनिया के अनेक देशों में गांधी जी के विचारों का अध्ययन किया जाता है। उनके सिद्धांत वैश्विक शांति, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि गांधी जी केवल भारत के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के नेता थे।
अंततः, महात्मा गांधी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं। वे हमारे समाज, हमारी सोच और हमारे नैतिक मूल्यों में निरंतर सांस लेते हैं। उनकी पुण्यतिथि हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे और एक अधिक शांत, न्यायपूर्ण और मानवीय समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
