चाणक्य नीति:- जीवन की निष्फलता
Date : 29-May-2024
धर्मार्थकाममोक्षेषु यस्यैकोपि न विद्यते |
जन्म जन्मानि मतर्येषु मरण मरनं तस्य केवलम ||
यहां आचार्य जीवन की निर्थकता की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जिस मनुष्य को धर्म, धन, काम - भोग, मोक्ष में से एक भी वस्तु नहीं मिल पाती, उसका जन्म केवल मरने के लिए ही होता है |
आशय यह है कि धर्म, धन, काम (भोग) तथा मोक्ष पाना मनुष्य - जीवन के चार कार्य हैं | जो व्यक्ति न तो अच्छे काम करके धर्म का संचय करता है, न धन ही कमाता है, न काम - भोग आदि इच्छाओं को ही पूरा कर पता है और न मोक्ष ही प्राप्त करता है, उसका जीना या मरना एक समान है | वह जैसा इस दुनिया में आता है, वैसा ही यहां से चला जाता है | उसका जीवन निरर्थक है |