आजाद हिंद फौज का गठन
कहा जाता है कि लाला लाजपत राय के कहने पर रासबिहारी बोस जापान चले गए थे। यहां राजा पी. एन. टैगोर के नाम से रहने लगे। उन्होंने अंग्रेजी अध्यापन, लेखन और पत्रकारिता का कार्य किया। ‘न्यू एशिया’ नामक समाचार-पत्र शुरू किया और जापानी भाषा में कुल 16 पुस्तकें लिखीं। मार्च 1942 में टोक्यो में उन्होंने ‘इंडियन इंडिपेंडेंस लीग’ की स्थापना की और भारत की स्वाधीनता के लिए एक सेना बनाने का प्रस्ताव भी पेश किया। यहीं से शुरुआत हुआ आजाद हिंद फौद की।
सुभाष चंद्र बोस को सौंपी कमान
इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के सम्मेलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को जापान आमंत्रित किया गया था। रासबिहारी और सुभाष चंद्र बोस दोनों ही अंग्रजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह के समर्थक थे। अंग्रजों की बड़ी खिलाफत करने के कारण सुभाष चंद्र बोस काफी मशहूर हो चुके थे। कहा जाता है कि उस समय सुभाष बर्लिन से जापान पहुंचे। रास बिहारी ने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की सैन्य शाखा के रूप इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) का गठन किया और सुभाषचंद्र बोस को इसका अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों की हालत कैसे खराब की यह सभी जानते हैं।
1945 में हुआ निधन
रास बिहारी बोस ने एक जापानी महिला से ही शादी की और वहां के नागरिक बन गए थे। 21 जनवरी 1945 को रास बिहारी बोस का निधन हो गया। जापान की सरकार ने उन्हें द सेकेंड ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन से सम्मानित किया था। हालांकि, इसके दो वर्ष बाद ही देश की स्वतंत्रता का उनका सपना पूरा हुआ था। आजादी के इस अमृत महोत्सव में पूरा देश रासबिहारी बोस को उनके योगदान के लिए धन्यवाद करता है।
