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मोदी के कार्यकाल में आर्थ‍िक क्षेत्र में कितना सशक्‍त हुआ भारत, चौंकाने वाले हैं आंकड़े

Date : 17-May-2024

केंद्र में देश की जनता किसे चुनने जा रही है यह कुछ दिनों में साफ हो जाएगा, किंतु जिस तरह से कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने भाजपा की केंद्र सरकार और पीएम मोदी को आर्थ‍िक क्षेत्र को आधार बनाकर घेरना जारी रखा है उसने आज पिछली मनमोहन सरकार और मोदी सरकार के कार्यकाल के तुलनात्‍मक अध्‍ययन के लिए प्ररित जरूर किया है । कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में बेरोजगारी की दर बढ़ी है और जनता परेशान है। किंतु क्‍या यह सच है? तब इस स्‍थ‍िति में आंकड़ों के आधार पर अध्‍ययन और उससे प्राप्‍त निष्‍कर्ष अवश्‍य देखे जाने चाहिए। 

वस्‍तुत: देश की जनता ने अटल सरकार के बाद दस साल कांग्रेस को भी दिए थे, लेकिन आंकड़े यही बता रहे हैं कि एनडीए की सत्‍ता में जिस गति से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार कार्य कर रही थी, वह गति कांग्रेस की मनमोहन सरकार आते ही धीमी पड़ गई, फिर भी देश की जनता ने एक भरोसा कर उन्‍हें दूसरा कार्यकाल दिया था, लेकिन यह क्‍या! कांग्रेस का दूसरा कार्यकाल भी वह चमत्‍कार नहीं कर पाया, जिसकी देश को आवश्‍यकता थी। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस स्‍थ‍िति में भारत की आम जनता ने फिर से भाजपा की ओर आशा भरी नजरों से देखा और नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में एनडीए को अपना कीमती वोट दिया। उसके बाद की स्‍थ‍िति पूरी दुनिया के सामने आज हमारी है। भारत कहां था और अब कहां से कहां पहुंच गया है! यह विश्‍व देख रहा है, कहना होगा कि दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्‍या वाला देश भारत विकास के सभी आंकड़े तोड़ रहा है। 
मोदी सरकार और पिछली मनमोहन सरकार के बीच भारत की जनसंख्‍या और उसके दबाव के बीच संतुलन को यदि देखें तो जब मनमोहन सरकार 2004 में सत्‍ता में आई तब देश की जनसंख्‍या  1.136 बिलियन थी जोकि दस वर्ष के कार्यकाल में बढ़कर 2014 की स्‍थ‍िति में 1.307 बिलियन पर जा पहुंची थी। लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने, तब यही जनसंख्‍या का ग्राफ बढ़कर  2015 में 1,322,866,505 हो गया और 2024 आते-आते यह जनसंख्‍या का आंकड़ा 1,441,719,852 को पार कर गया। पिछले दस सालों में 12 करोड़ अनुमानित जनसंख्‍या बढ़ी है। यह  नवीनतम आंकड़ा भारत की जनसंख्या (लाइव) वर्ल्डोमीटर के अनुसार है। यानी कि देश में एक ओर जनसंख्‍या का दबाव बढ़ रहा था तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका मंत्रीमण्‍डल अपने प्रयासों से आर्थ‍िक क्षेत्र में नवाचार करते हुए रोजगार बढ़ाने के कार्य में जुटे हुए थे । 
देखा जाए तो मनमोहन सिंह के कांग्रेस कार्यकाल की 4.7 प्रतिशत', भारत की आर्थिक विकास दर निराश करती है।  2012-13 में औद्योगिक विकास दर घटकर 20 साल के निचले स्तर एक प्रतिशत पर आ गई थी।  बैंकों के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स 2013 में 50 प्रतिशत बढ़ गए थे, जिसकी रिपोर्ट भी मौजूद है।  रुपया विश्‍व की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक हो गया था । लेकिन आज ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ अपेक्षा से अच्‍छा प्रदर्शन कर रही है। सीएजीआर मुद्रास्फीति पर 2004-14 के बीच यह 8.7 प्रतिशत थी, जो अब 2014-24 के बीते दस सालो के बीच 4.8 प्रतिशत हो गई है।  भारत का विनिर्माण पीएमआई 2008 के बाद से उच्चतम स्कोर पर मार्च में 59.1, वित्त वर्ष 24 के अंत तक बैंक एनपीए दशक के सबसे निचले स्तर 3.8 प्रतिशत पर पहुंच जाने की उम्‍मीद जताई जा रही है।  अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले रुपया सबसे बेहतर स्‍थ‍िति में है। अभी भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा, यही अनुमान दुनिया की हर एजेंसी का है। 
 
विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर तथ्‍यों के साथ बताते हैं, "वैश्विक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था में आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एक दशक तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में भारत 11वें स्थान पर था, जो कि अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है और बहुत जल्द तीसरे स्थान पर होगा।" जयशंकर कहते हैं, कि भारत आज पूर्व और पश्चिम में कॉरिडोर पर काम कर रहा है, जो एशिया के जरिए एटांटिक को पैसिफिक से जोड़ेगा। फिर इरान के चाबहार बंदरगाह का हालिया उदाहरण हमारे सामने है ही, जोकि मध्य एशियाई देशों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार प्रदान करता है। भारत ने सफलतापूर्वक इसके संचालन का भार अपने ऊपर लिया है। इसके साथ ही विश्व बैंक की लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग इस समय 38वीं है और यह बहुत तेजी से सुधर रही है।
यहां कुछ बड़े आंकड़ों पर भी गौर कर लेते हैं; मनमोहन की कांग्रेस सरकार के वक्‍त भारत दुनिया की सबसे कमजोर और सुस्त अर्थव्यवस्था वाले शीर्ष पांच देश में से एक था, जबकि अब इसका उलट है, वह विश्‍व की चौथी सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाले देश में शामिल होने जा रहा है और यदि फिर एक बार केंद्र में भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिलता है तो जो उम्‍मीद है उसके अनुसार शीघ्र ही भारत दुनिया की तीसरी फिर दूसरी सबसे बड़ी अर्थ व्‍यवस्‍था बन जाएगा। 
देश में मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल में 51.40 करोड़ रोजगार पैदा हुए हैं। घरेलू शोध संस्थान स्कॉच की एक रिपोर्ट जोकि हाल ही में ‘मोदीनॉमिक्स का रोजगार सृजनात्मक प्रभाव: प्रतिमान में बदलाव’ (“Employment Generative Impact of ModiNomics: The Paradigm Shifts”) शीर्षक से सामने आई है।  पूरी केस  स्‍टडी पर आधारित है, जिसमें मुख्‍यतौर पर  80 अध्ययनों को शामिल किया गया है, जिसमें सरकारी योजनाओं के आंकड़े भी शामिल हैं। यहां ये सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर समावेशी विकास के उद्देश्य से काम कर रहा ये घरेलू शोध संस्थान स्कॉच ग्रुप  2014 से 2024 के बीच सालाना कम से कम 5.14 करोड़ पर्सन-ईयर्स रोजगार पैदा करने का डेटा प्रस्‍तुत करता है । वस्‍तुत: पर्सन-ईयर इस बात का पैमाना है कि किसी व्यक्ति ने पूरे साल कितने घंटे काम किया। 
रिपोर्ट बता रही है क गत दस साल में 19.79 करोड़ रोजगार सरकारी योजनाओं के जरिए इनडायरेक्ट रोल की वजह से पैदा हुए हैं, जबकि 31.61 करोड़ रोजगार सरकार की लोन-आधारित योजनाओं के कारण संभव हो सके हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया द्वारा पूछे गए एक प्रश्‍न के उत्‍तर में जो कहा है वह भी समझने योग्‍य है। पीएम मोदी ने बताया है कि पिछले 10 साल में जो माइक्रो फाइनेंस हुआ है, इस माइक्रो फाइनेंस के कारण देश में बहुत रोजगार उपलब्ध हुआ है। 
वे कह रहे हैं कि ‘‘केंद्र की 10-12 योजनाएं ऐसी हैं, जिसके आधार पर उन्होंने एनालिसिस किया है कि एक घर बनता है तो कितने पर्सन आवर्स को रोजगार मिलता होगा।  इस आधार पर भारत में पांच करोड़ पर्सन आवर्स वार्षिक नौकरी जेनरेट हुई हैं। देश में चार करोड़ गरीबों के घर बने हैं। 11 करोड़ टॉयलेट बने हैं।  दुनिया में सबसे तेज गति से 5जी रोलआउट हुआ,  इसके लिए इन्फास्ट्रक्चर लगता है। पीएलएफएस के मुताबिक 6-7 साल में 6 करोड़ नए जॉब ऑन रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं। ईपीएफओ में 10 साल में कवर होने वाले लोगों में 167 परसेंट बढ़ोतरी हुई है।  मुद्रा लोन के तहत करीब 43 करोड़ लोन्स दिए गए, इसमें 70 परसेंट ऐसे हैं, जो पहली बार रोजगार कर रहे हैं।  वे भी दूसरों को रोजगार दे रहे हैं।’’ 
भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के स्‍तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, यह 2014 में 36 बिलियन डॉलर के मुकाबले बढ़कर 2022 में 83.5 बिलियन डॉलर हो गया है। भारत का निर्यात बाजार जो 2014 में 466 बिलियन डॉलर का था, वह 2023 तक आते-आते 776 बिलियन डॉलर का हो गया और उसके बाद वाणिज्य मंत्रालय के लेटेस्ट आंकड़ों को देखें तो एक्सपोर्ट के मामले में वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत शानदार रही है।  अप्रैल 2024 में देश का टोटल एक्सपोर्ट (वस्तु और सर्विसेस ) 6.88 प्रतिशत बढ़ा है।  इस साल अप्रैल में देश से कुल 64.56 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट हुआ है। 
यहां भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की बात करना भी समीचीन होगा; वर्ष 2014 के 303 बिलियन डॉलर के मुकाबले यह बढ़कर 2024 में 645 बिलियन डॉलर हो गया है । निश्‍चित ही यह कार्य विदेशियों का विश्‍वास जीते वगैर संभव नहीं हो सकता था। इसी तरह से देश के करेंट अकाउंट घाटा (डेफिसिट) की जीडीपी की तुलना देखी जा सकती है, जोकि 2013 में 5.1 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में घटकर 1.2 प्रतिशत पर आ गया है। मोदी सरकार ने आम जनता को ऋण के मामले में भी बहुत अधिक सुविधा दी है और महंगाई को भी अपने कंट्रोल में करके रखा है, बनस्पत उस स्‍थ‍ि‍ति में जब भारत से लगे सभी सार्क देशों समेत पूरे युरोप और अमेरिका में महंगाई से आग लगी हुई है ।
भारत के आर्थ‍िक विकास को लेकर हमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कही बातों पर भी गौर करना चाहिए,  वे कह रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ढांचागत विकास में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार से बेहतर कार्य किया है।  ‘संप्रग के कार्यकाल के दौरान कुल व्यय में पूंजीगत व्यय की हिस्सेदारी बहुत तेजी से गिरी थी। वर्ष 2003-04 में यह 23 प्रतिशत थी, लेकिन 2005 से 2014 के बीच यह गिरकर औसतन 12 प्रतिशत पर आ गई। कल्पना कीजिए कि कांग्रेस के कारण भारत ने पूंजीगत व्यय में पर्याप्त निवेश नहीं करके कितना बड़ा मौका गंवा दिया। हमारी सरकार ने पूंजीगत व्यय में अच्छी-खासी बढ़ोतरी की है। वर्ष 2023-24 में कुल पूंजीगत व्यय की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत तक हो गई है, जबकि वर्ष 2013-14 में यह मात्र 12 प्रतिशत ही थी।’ 
निर्मला सीतारमण साथ ही में एनआईपीएफपी रिपोर्ट का जिक्र करती हैं, और बताती हैं कि मोदी सरकार ने ढांचागत विकास पर पूर्ववर्ती सरकार के मुकाबले 3.7 गुना पैसा खर्च किया है। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए वे तत्कालीन कैबिनेट सेक्रेटरी के वक्‍तव्‍य को याद दिलाती हैं, जिन्होंने वर्ष 2013 में कहा था कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में विशेषकर ढांचागत और विनिर्माण की कई बड़ी परियोजनाएं निवेश नहीं मिलने के कारण अटक गई हैं, क्योंकि उन्हें विभिन्न प्रकार की मंजूरियां अथवा क्लियरेंस मिलने में देर हो रही है, जबकि आज स्‍थ‍िति इससे उलट है। ढांचागत और विनिर्माण की कई छोटी-बड़ी परियोजनाओं को पर्याप्‍त निवेश मिल रहा है। 
वर्ष 2014 के बाद से देश में मेट्रो नेटवर्क लगभग चार गुना बढ़ गया है। उस समय देश के बड़े पांच शहरों में मेट्रो नेटवर्क की लंबाई केवल 248 किलोमीटर थी, लेकिन अब 20 शहरों तक मेट्रो पहुंच चुकी है और मेट्रो रेल नेटवर्क बढ़कर 939 किलोमीटर हो चुका है। इसके अलावा, पिछली सरकार के दस वर्षों में 14,985 किलोमीटर रेल ट्रैक नेटवर्क बिछाया गया था, जबकि मौजूदा सरकार के पिछले नौ वर्षों में यानी वर्ष 2014 से 2023 के बीच 25,871 किलोमीटर रेल ट्रैक नेटवर्क बिछाया जा चुका है। दस साल पहले जहां एक दिन में केवल 4 किलोमीटर रेल ट्रैक ही बिछाया जाता था, इस सरकार में रेल मंत्रालय ने वर्ष 2023-24 के दौरान प्रति दिन 14.5 किलोमीटर रेल ट्रैक (कुल 5,300 किमी) बिछाया।
राष्ट्रीय राजमार्ग का नेटवर्क 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पहले यानी 2014 में 91,287 किलोमीटर हाइवे थे, वर्ष 2023 में यह बढ़कर 1,46,145 किलोमीटर हो गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों में 3.74 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं। इस क्षेत्र में भी मोदी सरकार का रिकॉर्ड पिछली सरकार के मुकाबले दोगुने से अधिक का है। इस समय लगभग 99 प्रतिशत गांव सड़कों से जुड़ चुके हैं। सीतारमण ने मोदी सरकार के समय सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया है, उनका कहना है कि इससे न सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि को बढ़ावा मिलता है बल्कि यह अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक सक्षमता को भी सुधारती है।
कहना होगा कि  सड़क संपर्क बढ़ने से न सिर्फ निवेश को गति मिली है, बल्कि स्थानीय कारोबार भी तेजी से तरक्की करता दिख रखता है, क्योंकि बाजारों तक पहुंच आसान है और ढुलाई लागत कम हो गई है। बेहतर सड़कों के कारण देश में वार्षिक स्तर पर ढुलाई लागत में 2.4 लाख करोड़ रुपये से 4.8 लाख करोड़ रुपये बचने की संभावना है। आज स्‍वयं प्रधानमंत्री मोदी प्रगति मंच के जरिये इन परियोजनाओं की प्रगति की व्यक्तिगत तौर पर निगरानी कर रहे हैं। इससे लंबे समय से लटकी परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी होती दिख रही हैं।  
इस आधार पर कहना होगा कि किसी भी सरकार की मंशा ठीक हो तो वह अपने कार्यकाल में क्‍या कुछ कर सकती है और विकास के स्‍तर पर कितना बड़ा परिवर्तन ला सकती है, इसका सबसे अच्‍छा दुनिया में कोई उदाहरण है तो वह भारत की मोदी सरकार का आज आपको दिखाई देता है।  यह भी एक तथ्‍य हैं कि 10 सालों में ब्याज दरों में आई भारी गिरावट मध्यम वर्ग के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई है। 2014 में जहां शिक्षा ऋण की ब्याज दर 14.25 प्रतिशत, होम लोन की 10.15 प्रतिशत, ऑटो लोन की 10.95 प्रतिशत और पर्सनल लोन की 14.25 थी। वहीं, 2024 के आंकड़े यह प्रमाणित कर रहे हैं कि वर्तमान में शिक्षा ऋण 8.15 प्रतिशत, होम लोन 8.35 प्रतिशत, ऑटो लोन 7.25 प्रतिशत और पर्सनल लोन की ब्याज दर 10.50 प्रतिशत है। जोकि हर हाल में मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार की तुलना में सभी में कम है, जिसका कि सीधा लाभ देश के आम नागरिक को आज मिल रहा है। 
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कही इस बात को सभी को समझना होगा कि ‘इस देश में पहले ऐसा था कि सब गरीब थे, अब आप कहते हैं कि सब अमीर होने चाहिए, तो ये धीरे-धीरे ही होगा।  रातोरात तो नहीं होगा।  थोड़े लोग ऊपर आएंगे, वो नीचे वालों को ऊपर लाएंगे, वो और ऊपर आएंगे तो नीचे के लोग ऊपर जाएंगे, यह एक प्रोसेस होती है या तो हम तय कर लें कि हम सब गरीब रहना चाहते हैं। हमें कोई जरूरत नहीं है। दूसरा रास्ता ये है कि हम कोशिश करें कि आगे बढ़ें। आज दस आगे बढ़ेंगे, कल 100 बढ़ेंगे, फिर 500 बढ़ेंगे।  पहले हमारे देश में कुछ सैकड़ों स्टार्टअप थे, और अब सवा लाख हैं। पहले हवाई जहाज में बैठने वाले लोगों की संख्या कम थी, आज एक हजार नए हवाई जहाज का ऑर्डर देना पड़ा है। आज बद्रीनाथ, केदारनाथ की यात्रा के लिए जो लोग जा रहे हैं, वो संख्या करोड़ों में पहुंच गई है।  भारत के लोग शादी के लिए विदेश में जा रहे हैं। अगर पहले की तरह पांच ही अमीर लोग होते, तो इतनी शादी विदेश में कैसे करवाना संभव होता।  पहले रिलीजियस टूरिज्म था, अब उन्होंने वेडिंग के लिए उसके साथ थोड़ी फैसिलिटी बढ़ाई, तो ऑफ सीजन में उनको फायदा हुआ है। आर्थ‍िक स्‍तर पर देश में हर जगह आप विकास होता देख सकते हैं’ ।
 
लेखक - डॉ. मयंक चतुर्वेदी 

 


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