अब वैश्विक स्तर पर भी भारत के विरुद्ध झूठा विमर्श गढ़ा जा रहा है
Date : 16-May-2024
भारत ने जब से ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की शुरुआत की है, वैश्विक स्तर पर कई देशों, विशेष रूप से चीन, को भारत का यह अभियान रास नहीं आ रहा है क्योंकि अब भारत कई क्षेत्रों में तेजी से आत्मनिर्भर बनता जा रहा है जबकि पूर्व में विभिन्न उत्पादों का आयात इन देशों से किया जाता था। बल्कि, अब तो भारतीय कम्पनियां कई ऐसे उत्पादों का निर्यात भी करने लगी हैं जिनका पहिले इन देशों से आयात किया जाता था, अतः इन देशों के अन्य देशों को निर्यात भी अब प्रभावित होने लगे हैं। इस प्रकार, आत्मनिर्भर भारत अभियान कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर गहरी चोट करता हुआ नजर आ रहा है, जिसके चलते ये देश भारत के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुष्प्रचार कर रहे हैं ताकि भारतीय नागरिकों को विचलित किया जा सके और जिससे अंततः भारत की आर्थिक प्रगति प्रभावित हो।
भारत में वैसे भी झूठे विमर्श गढ़ने का इतिहास रहा है। अंग्रेजों के शासन काल में भी कई प्रकार के झूठे विमर्श गढ़ने के भरपूर प्रयास हुए थे जैसे पश्चिम से आया कोई भी विचार वैज्ञानिक एवं आधुनिक है, भारत सपेरों का देश है एवं इसमें अपढ़ गरीब वर्ग ही निवास करता है, सनातन भारतीय संस्कृति रूढ़िवादी एवं अवैज्ञानिक है, शहरीकरण विकास का बड़ा माध्यम है अतः ग्रामीण विकास को दरकिनार करते हुए केवल शहरीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, शहरी, ग्रामीण एवं जनजातीय के बीच में आर्थिक विकास की दृष्टि से शहरी अधिक महत्व के क्षेत्र हैं, विदेशी भाषा को जानने के चलते नागरिकों में आत्मविश्वास बढ़ता है, संस्कृति से अधिक तर्क को महत्व दिया जाना चाहिए, व्यक्ति एवं समश्टि में व्यक्ति को अधिक महत्व देना अर्थात व्यक्तिवाद को बढ़ावा देना चाहिए (पूंजीवाद की अवधारणा), कम श्रम करने वाला व्यक्ति अधिक होशियार माना गया, सनातन हिन्दू संस्कृति पर आधारित प्रत्येक चीज को हेय दृष्टि से देखना, जैसे दिवाली के फटाके पर्यावरण का नुक्सान करते हैं, होली पर्व पर पानी की बर्बादी होती है। कुल मिलाकर पश्चिमी देशों द्वारा आज सनातन भारतीय संस्कृति पर आधारित हिन्दू परम्पराओं पर लगातार प्रहार किए जा रहे हैं।