प्रेरक प्रसंग:- निंदक नियरे राखिये Date : 14-May-2024 विनोबाजी अपने पत्रों को संभालकर रखते थे और उन सबका यथावत् उत्तर भी दिया करते थे | एक दिन उनके पास गाँधीजी का एक पत्र आया, तो उन्होंने उसे पढ़कर फाड़ दिया | समीप ही श्री कमलनयन बजाज भी बैठे थे | उन्हें यह देख आश्चर्य हुआ | वह अपने उद्वेग को दबा न सके और उन्होंने उन फाड़े टुकड़ों को जोड़कर पढ़ा तो उसे विनोबाजी की प्रशंसा से ओत-प्रोत पाया | उसमें लिखा था – “आपके समान उच्च आत्मा मैंने और कहीं नहीं देखा |” साश्चर्य बजाजजी ने पूछा- “आपने यह पत्र फाड़ क्यों दिया ? सही बात जो लिखी थी | इसे संभालकर रखना था | “ सस्मित विनोबाजी ने उत्तर दिया, “यह पत्र मेरे लिए बेकार है, अत: मैंने फाड़ डाला | पूज्य बापू ने अपनी विशाल दृष्टि से मुझे जैसा देखा, इस पत्र में लिख दिया है, पर मेरे दोषों की उन्हें कहाँ खबर ? मुझे तो आत्म-प्रशंसा बिल्कुल पसंद नहीं | हाँ ! कोई मेरे दोष बतावे, तो मैं बराबर उनका ख्याल करूँगा |