भारत की साँस्कृतिक अवधारणा का अपमान और संविधान की भावना के विरूद्ध है सैम पित्रोदा का नस्लभेद संबंधी वक्तव्य
Date : 13-May-2024
काँग्रेस की सलाहकार टोली के प्रमुख सदस्य श्री सैम पित्रोदा ने
सैम पित्रोदा अपने वक्तव्यों को लेकर सदैव चर्चित रहे हैं। उन्होने कभी मिडिल क्लास से अधिकतम टैक्स वसूलने की सलाह दी, तो कभी विरासत में मिली संपत्ति का एक बड़ा भाग सरकार द्वारा ले लेने की बात कही । जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या में भगवान रामलला जन्मस्थान मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ तब उन्होंने मंदिर को अनावश्यक बताया था । अब उनका नया वक्तव्य आया है ।उन्होंने इस वक्तव्य में भारत के निवासियों को उनके रंग, क्षेत्र एवं कद-काठी के आधार पर वर्गीकृत किया है और विदेशी नस्लों से जोड़ा है। श्री सैम पित्रोदा ने अपने वक्तव्य में पूर्वी भारत के लोगों चाइनीज नस्ल जैसा, उत्तर भारत के लोग अंग्रेजी, पश्चिम भारत के लोगों को अरब, और दक्षिण के लोगों अफ्रीकी नस्ल जैसा माना है । सैम पित्रोदा यहीं न रुके । उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण भारत के लोग अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिमान होते हैं। सैम पित्रोदा इन दिनों अमेरिका में रहते हैं। उनका ये वक्तव्य वहीं से आया है । वे काँग्रेस के वरिष्ठ सदस्य और ओव्हरसीज काँग्रेस के अध्यक्ष हैं। काँग्रेस की यह शाखा अमेरिकी और यूरोपीय देशों में सक्रिय है । काँग्रेस के सलाहकार समूह में वे महत्वपूर्ण सदस्य हैं, स्वर्गीय राजीव गाँधी के विश्वस्त रहे और उन्हें श्री राहुल गाँधी का सलाहकार भी माना जाता है । उनके सुझावों पर काँग्रेस ने अनेक नीतिगत निर्णय लिये हैं । भारत में विभेद पैदा करने वाला वक्तव्य ऐसे समय आया जब पूरा देश अठारहवीं लोकसभा चुनाव के वातावरण में तैर रहा है । तीन चरणों का मतदान हो चुका है । चार चरणों का मतदान और होना है । लोकसभा के इस चुनाव में भी वर्ष 2019 की भाँति साँस्कृतिक राष्ट्रभाव और सामाजिक एकत्व भाव प्रबल हो रहा है। सत्य क्या है यह तो चार जून को परिणाम के साथ ही पता चलेगा किन्तु अभी यह माना जा रहा है कि इस सांस्कृतिक राष्ट्रभाव और एकत्व का झुकाव की ओर है । प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने पहले कार्यकाल में अपना पद संभालते ही इस एकत्व पर जोर दिया था । उनका नारा था- "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" । समय के साथ अयोध्या में रामजन्म स्थान मंदिर योजना ने भी आकार लिया । अब यह मोदीजी का नारा हो या कालचक्र का अपना प्रभाव कि सामाजिक एकत्व और साँस्कृतिक राष्ट्रभाव इन दस वर्षों में अधिक मुखर हुआ है । और इसका आधार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को माना जा रहा है । लोकसभा के इस चुनाव में भी इसकी झलक स्पष्ट है । इह वातावरण से उन राजनीतिक दलों को अपनी सफलता कुछ दूर दिखाई दे रही है जिनका लक्ष्य केवल सत्ता है और उसे प्राप्त करने केलिये कोई भी फार्मूला अपना सकते हैं। सल्तनत काल और अंग्रेजी काल का इतिहास गवाह है विदेशी शक्तियों ने भारत में अपनी जड़े जमाने के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय विभेद पैदा करने का ही षड्यंत्र किया था। इसी की झलक इस चुनाव प्रचार में दीख रही है । सामाजिक एकत्व में सेंध लगाने केलिये पहले जाति आधारित जनगणना और धर्म आधारित आरक्षण पर बहुत जोर दिया गया फिर शब्दांतरण से मुस्लिम समाज के आरक्षण का संकेत भी आया । इंडी गठबंधन के मह्त्वपूर्ण घटक लालू प्रसाद यादव ने तो मुस्लिम समाज को आरक्षण देने की बात खुलकर कही। इन बातों का प्रभाव तीसरे चरण के मतदान में न दिखा । बल्कि पहले और दूसरे चरण के मतदान के रुझान में तो मीडिया ने यह अनुमान भी व्यक्त कि इस बार भाजपा दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु में भी खाता खोल सकती है । यदि ऐसा हुआ तो संसद में विपक्ष की शक्ति वर्तमान स्थिति से कुछ कमजोर हो सकती है । इसकी भरपाई अगले चार चरणों के मतदान से ही संभव है । जो केवल और केवल सामाजिक एकतव में सेंध लगाकर ही संभव है । यह केवल संयोग है या किसी रणनीति का अंग कि श्री सैम पित्रोदा का वक्तव्य तीसरे चरण के मतदान के तुरन्त बाद आया । इस वक्तव्य में अँग्रेजों के उसी षड्यंत्र की झलक है जो उन्होंने भारत में अपनी जड़ों को जमाने केलिये किया था । उनकी घोषित नीति थी- "बाँटो और राज करो" । इसी षड्यंत्र के अंतर्गत उन्होंने विभाजन के बीज बोये थे । अपनी "डिवाइड एण्ड रूल" थ्योरी में अंग्रेजों ने जो विन्दु उठाये थे ठीक वही विन्दु श्री सैम पित्रोदा के वक्तव्य में हैं। अंग्रेजों ने सबसे पहले आर्यों को हमलावर बताया था और उन्हें यूरोपीय नस्ल से जोड़ा था दक्षिण भारत को उत्तर भारत से अलग बताया और वनवासियों को अफ्रीकन नस्ल से जोड़ा था । अपनी सत्ता की जड़े जमाने के लिये अँग्रेजों ने समाज को बाँटने का काम केवल भारत में नहीं किया । पूरी दुनियाँ में किया, वे जहाँ गये वहाँ किया । अमेरिका और अफ्रीका में तो रंग के आधार पर कानून भी बनाये थे । दक्षिण अफ्रीका में गाँधी जी ने सबसे पहला आँदोलन रंग भेद के विरूद्ध ही किया था । भारत में सामाजिक विभाजन को गहरा करने केलिये अँग्रेजों ने जाति, धर्म और क्षेत्र को आधार बनाया । इसी आधार पर सेना गठित की और जेल मैनुअल बनाया । अधिकांश प्रांतों में दो रेजीडेंट बनाई गई। जैसे पंजाब रेजिमेंट भी और सिक्ख रेजीडेंट भी, राजस्थान रेजिमेंट भी और राजपूताना राइफल्स भी, मराठा रेजिमेंट भी और महार रेजिमेंट भी । अंग्रेजों ने धर्म के आधार पर मुस्लिम रेजिमेंट भी बनाई थी । सबकी भर्ती की प्राथमिकता में अंतर था ।