आदि शंकराचार्य हिंदू दार्शनिक और धर्मगुरू
Date : 12-May-2024
आदि शंकराचार्य हिंदू दार्शनिक और धर्मगुरू थे, जिन्हें हिंदुत्व के सबसे महान प्रतिनिधियों में एक माना जाता है| आदि शंकराचार्य, चमकदार आध्यात्मिक प्रकाश के अद्भुत स्रोत थे। उन्होंने सारी भारत भूमि को अपने ज्ञान से प्रकाशमान किया|
सनातन धर्म को मजबूत करने के लिए आदि शंकराचार्य ने भारत में 4 मठों की स्थापना भी की, जिसमें गोवर्धन, जगन्नाथपुरी (उड़ीसा) पूर्व में, पश्चिम में द्वारका शारदामठ (गुजरात), ज्योतिर्मठ बद्रीधाम (उत्तराखंड) उत्तर में , दक्षिण में शृंगेरी मठ, रामेश्वरम (तमिलनाडु) शामिल है|
छोटी सी उम्र में किया महान काम
788 ई|पू| केरल स्थित कलाड़ी में शंकर नाम के एक बालक का जन्म हुआ| दो साल की उम्र में इस बालक ने धाराप्रवाह संस्कृत बोलने और लिखने में महारत हासिल की| चार साल का होते होते वे सभी वेदों का पाठ करने में सक्षम थे और 12 की उम्र में उन्होंने संन्यास ले कर घर छोड़ दिया था|
पूरे भारत में सनातन हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया
बालक शंकर ने मौजूदा हिंदू धर्म के सिद्धांतों से कहीं आगे अद्वैत दर्शन के बारे में लोगों को ज्ञान देना शुरू कर दिया| छोटी उम्र में भी उन्होंने शिष्य इकट्ठा कर लिये थे, जिनके साथ उन्होंने आध्यात्मिक विज्ञान को फिर से स्थापित करने के लिये देश भर में घूमना शुरू कर दिया था|
12 से 32 की उम्र तक उन 20 सालों में उन्होंने हिंदुत्व की रक्षा के लिए भारत के चारों कोनों की कई यात्रायें कीं - उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम| मठों में शंकराचार्य की परंपरा अभी तक चली आ रही है| ये हिंदू धर्म में सबसे सर्वोच्च पद माना जाता है|
आदि शंकराचार्य के कार्य
आदि शंकराचार्य एक अभूतपूर्व कवि थे और उन्होंने अपने हृदय में एक अति प्रेम के साथ परमात्मा को धारण किया। उनकी रचनाओं में 72 ध्यान और भक्तिपूर्ण भजन शामिल हैं। उनमें निर्वाण शाल्कम, सौंदर्य लहरी, मनीषा पंचकम और शिवानंद लहरी शामिल है।
उन्होंने प्राथमिक ग्रंथों जैसे भगवद गीता, ब्रह्म सूत्र और 12 महत्वपूर्ण उपनिषदों पर 18 भाष्य भी लिखे हैं। शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन की मूल बातों पर एक विलक्षण या अविभाजित ब्रह्म के सत्य की व्याख्या करते हुए 23 पुस्तकें भी लिखीं। आत्म बोध, विवेक चूड़ामणि, उपदेश सहस्री और वाक्य वृत्ति उनमें से कुछ हैं।
आदि शंकराचार्य की कुछ शिक्षाएँ
• अज्ञान का नाश ही मोक्ष है।
• सही समय पर किया गया दान अनमोल है।
• सत्य वह है जो प्राणियों की सहायता करता है।
• स्वयं का शुद्ध मन ही सबसे बड़ा तीर्थ है।
• वह ज्ञान है जो ब्रह्म से एकाकार होने में सहायता करता है