छत्तीसगढ़ में देखा जाएं तो बहुत से मंदिर है उनमे से एक है कोरबा जिले के पोड़ीखोहा नामक गाँव में स्थित माँ कोसगाई माता का मंदिर | नवरात्रि में यहाँ अनेकों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते है | बीहड़ जंगलों के बीच पहाड़ी पर स्थित यह एक चमत्कारी मंदिर है| मान्यता है कि माता समय-समय पर अपनी मूर्ति रूप को छोड़कर चली जाती हैं तथा नवरात्रि के समय भक्तों के लिए वापस मंदिर में लौटती है | कोरबा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी पर, कोसगाई पहाड़ पर स्थित देवी माता का मंदिर अपनी प्रचीन पुरातात्विक धरोहर के लिए के लिए विख्यात है |
पहाड़ ऊपर निर्मित मंदिर में गुंबद भी नहीं है। जन श्रुति के अनुसार देवी को छत्र-छाया में रहना पसंद नहीं है। यहाँ के रहने वालों का कहना है कि माता कोसगाई के मंदिर पर छत बनाने के कई बार प्रयास किया गया किन्तु यहाँ किसी न किसी कारणवश असफल रहा |
इस मंदिर का निर्माण 16 वीं शताब्दी में में हुआ था | हयवंशी राजा बहारेन्द्र साय ने मां कोसगाई मंदिर की स्थापना की थी | मान्यता के अनुसार वह रतनपुर से खजाना लेकर आएं थे | इस खजाने को कोसगाई में छुपाया था | खजाने की रक्षा और क्षेत्र में शांति के लिए इस मंदिर को स्थापित किया गया | बस्ती से 200 फीट ऊंची पहाड़ की चोटी पर स्थित कोसगाई माता शांति का प्रतीक है | मान्यता के अनुसार मंदिर में लाल कपड़ा नहीं चढ़ाया जाता यहां सिर्फ मां को सफेद कपड़े ही चढ़ाए जाते हैं |
