साल के पहले ही दिन की शुरुआत एक महान वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस की जयंती से होती है। दुनिया भर में “गॉड पार्टिकल” के जनक के नाम से मशहूर बोस ने विज्ञान के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है । उनके जीवन से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जानेगें -
बोस ने करीब 60 साल पहले ही अपने शोध पत्रों में जो विवेचना की थी, उन्हीं के आधार पर LHC का प्रयोग सफल हो सका था, लिहाजा ईश्वरीय कण को उनका नाम दिया गया |
तकरीबन 12 साल पहले, साल 2008 में एक तरफ जहां दुनिया एक भ्रम के कारण खौफ में थी तो वहीं दूसरी ओर विज्ञान उस महाप्रयोग की शुरुआत करने जा रहा था, जो जीवन के सच के खोज से जुड़ा था. अस्तित्व से जुड़ा यह वैज्ञानिक मंथन लार्जन हाइड्रेन कोलाइडर (LHC) था.
भ्रम था कि इस प्रयोग से दुनिया नष्ट हो सकती है. चार साल तक चले इस मंथन में जो निकलकर सामने आया वह देश के लिए गौरव का क्षण था. वैज्ञानिकों को वह मिल गया था जिसकी तलाश मानव सभ्यता शुरुआत से कर रही थी.God Partical यानी ईश्वरीय कण. जब यह मिला तो इसे नाम दिया गया “हिग्स बोसोन” |
भारत की महान वैज्ञानिक परंपरा में सत्येंद्र नाथ बोस उस कड़ी में से एक हैं जो दुनिया का मार्गदर्शन करती रही है.
