एक जनवरी को अन्ग्रेजी नववर्ष का बधाई संदेश न भेजकर, अपने हिन्दू -सनातन धर्म का परिचय दें | The Voice TV

Quote :

"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

Editor's Choice

एक जनवरी को अन्ग्रेजी नववर्ष का बधाई संदेश न भेजकर, अपने हिन्दू -सनातन धर्म का परिचय दें

Date : 31-Dec-2023

जरा विचार कीजिए , जब ना कोई मूसा पैदा हुआ था और न ईसा, न ही दूर-दूर तक कहीं किसी मोहम्मद का अता-पता था, तब संपूर्ण विश्व में रह रहे मानव समुदाय का धर्म क्या था ? उसकी संस्कृति -सभ्यता क्या थी ?? आखिर वे थे तो मानव ही ,कोई 'डार्विन के पूर्वज' तो थे नहीं की जिनकी पूँछ घिसते- घिसते लुप्त हो गई।

 

रोम के पुराकालीन मंदिर का 'नीलम का शिवलिंग' आज भी पोप के कब्जे में है। जन्म से हर व्यक्ति हिंदू ही पैदा होता है। सुन्नत और कलमा के बाद ही वह ईसाई या मुसलमान बनता है। यह सभी को स्मरण रहना चाहिए।* 

 

आखिर मूलत: मूसा था कौन ? उसी देश की संतान न, जिसके 11 प्राचीन सम्राटों के नाम से 'राम' जुड़ा था। 'राम' नाम से जुड़े लोग यदि हिंदू -सनातनी नहीं थे , तो और कौन थे ?

 

हमारे लिए एक जनवरी कैलेण्डर महीना है जैसे बाकि के 11 महीने होते हैं। हिंदूऔ- भारतीयो का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा / नवरात्रि से आरंभ होता  हैं।

 

वो कहते हैं-

 

दीपावली पर आतिशबाजी नहीं।

होली पर पानी नहीं,

शिवलिंग पर दूध नहीं।

गाय हमारी माता नहीं।।

सनातन कोई धर्म नहीं।

राम कोई भगवान नहीं।।

शर्म, लिहाज ,संस्कार नही।

हिन्दु रीति-रिवाज मंजूर नहीं।

हम कहते हैं एक जनवरी नववर्ष नहीं।

विदेशी नववर्ष पर बधाई संदेश नही।

पार्टी, हुडदंग नही।।

 

अंग्रेज हिन्दुस्तान 1947 में छोड़ गये परन्तु गुलामी की मानसिकता नहीं गई व काले अन्ग्रेज़ को यहीं छोड़ गये। ये मूर्ख 1जनवरी को अपना  नव वर्ष मानते हैं। बधाई संदेश भेजते हैं, खुशिंया मनाते हैं । पार्टी, हुडदंग,अश्लीलता करते हैं। *अन्ग्रेजी मानसिकता के लोग अप्रैल मे मूर्ख दिवस बनाते हैं जबकि अप्रैल मे हिंदू/ भारतीय  नववर्ष होता है। भगवान महावीर जयंती होती है। हिन्दुस्तान का वित्तीय वर्ष चालू होता है। बसंत त्रतू होती है प्रकृति में नूतनता की वयार होती है,मौसम न गर्म ,न शरद ,न बरसात।

विदेशी नववर्ष (1 जनवरी) हमें स्वीकार नहीं।        

मदीरा,ड्रगस लेना हमारा संस्कार नहीं। 

जीव,जन्तु अंडा,मांस खाना हमारा धर्म नहीं।।

मोमबत्ती बुझाना हमारी संस्कृति नहीं। 

हुडदंग,बेहुदगी,बेशर्मी, अश्लीलता हमारा संस्कार नहीं।  

यह अपना त्योहार नहीं।

विदेशी नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं।।

 

न हमे इसका इन्जार है।

न यह सादगी का त्योहार है।

न इसमे हमारा इतिहास है।

न इसमे छलकती हिन्दूऔ की छाप है

न इस दिन से हिन्दुओ का विकास है।

न यह हमारी संस्कृति व शान है।

न ही इस दिन से हमारा आत्मसम्मान है

न हमे विदेशी नववर्ष स्वीकार है

 

आओ जागें और जगाएं।

अपनी संस्कृति व संस्कार अपनाएं ।

विदेशी संस्कृति को भगायें।

हिन्दुस्तान को हिंदू राष्ट्र बनाएं

स्वामी विवेकानंद ने कहा था - " मुझे अपने आप को हिंदू कहलाने में गर्व होता है।"*" I am proud to Call myself a Hindu."

योगीराज महर्षि अरविंद* का कथन है-    जिसे हम हिंदू धर्म कहते हैं वह वास्तव में सनातन धर्म है, क्योंकि यही वह विश्वव्यापी धर्म है जो दूसरे सभी धर्मो का आलिंगन करता है। यदि कोई धर्म विश्वव्यापी ना हो तो वह सनातन भी नहीं हो सकता।"

"भारतवर्ष उठ रहा है, सारे संसार पर वह सनातन ज्योति बिखरने के लिए जो उसे सौंप गई है। भारत का जीवन सदा ही मानव जाति के लिए रहा है।"

अपनी सनातन /आर्य/ देव / हिन्दु संस्कृति पर गर्व करें ,भारतीय होने का परिचय दें। 

हिंदू से बाहर कहीं कुछ है भी !

' *स्व* ' का जागरण, ' *आत्मबोध' / रास्ट्रवोध* ही समस्या का *समाधान है* ।

देश अपना वही है, जगत का गुरु ।

आज आज्ञान में है, भटक क्यों रहा?

पार जिसने करोडो को, है कर दिया ।

रास्ते में अरे है,अटक क्यों रहा।।

भाव दैवी जगा लो, हृदय में अगर ।

देश का, विश्व का भाग्य ,सँवर जाएगा।।

गुड मार्निग नहीं - राम जी राम  कहो 

इण्डिया नहीं भारत कहो 

वन्देमातरम् !!जय जय सिया राम!!

 

लेखक - डॉ. नितिन सहारिया


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement