प्रेरक प्रसंग अध्याय 8: दूध और खून | The Voice TV

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"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

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प्रेरक प्रसंग अध्याय 8: दूध और खून

Date : 28-Nov-2023

 गुरु नानक लोगों को उपदेश देते हुए एक गाँव में पहुँचे | वहाँ वे एक गरीब बढ़ई के घर पर ठहरे | उसका नाम 'लालो' था | उसी गाँव  में एक धनाढ्य  व्यक्ति रहता था| जिसका नाम 'मालिक भागो' था | उसने एक दिन गाँव के लोगों को भोजन के लिए निमंत्रित किया | सारे लोग के खा चुकने पर उसने नौकरों  से पूछा कि कहीं कोई आदमी गाँव में उसके यहाँ बिना खाये तो नहीं है ? इस पर नौकरों  ने बताया कि लालो एक साधु आया है जो भोजन से वंचित रहा है | भागो ने गुरुनानक को बुलाया तथा उनसे पूछा,''आप मेरे यहाँ भोजन करने क्यों नहीं आये?'' गुरु नानक के कहा,''अब आया हूँ |'' नौकरों  ने उनके सामने तरह-तरह के पक्ववान लाकर रखे | तब गुरु नानक ने भी लालो से भी घर से भोजन लेन को कहा |

वह घर जाकर रोटियाँ ले आया | गुरु नानक ने भागो की रोटी लेकर उसे दबाया, तब उसमें  से खून  निकलने लगा | फिर लालो की रोटी को दबाया, तो उसमें से दूध निकलने लगा | यह देख वहाँ उपस्थित लोग चकित हो गए | तब नानकजी ने बताया भागो,ने गरीबों को लूटा है, इसलिए इसकी रोटी में गरीबों का खून है, जबकि लालो की कमाई ईमानदारी की है, अतः उसकी रोटी से दूध निकला|''

यह सुन भागो नानक के चरणों में गिर पड़ा  और उसने क्षमा माँगकर कहने लगा कि आगे से मेहनत की कमाई खाएगा  तथा दूसरों को कष्ट न देगा |  


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