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कार्तिक पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि और संपूर्ण जानकारी जाने पंडित यशवर्धन पुरोहित से

Date : 26-Nov-2023

 हिंदू कैलेंडर का कार्तिक मास को हमारे शास्त्रों में काफी महत्व बताया गया है। इसके हर एक दिन कोई न कोई त्योहार या पर्व होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कार्तिक पूर्णिमा। इस दिन का पुराणों और शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। इस पर्व के बारे में कहा जाता है कि यह महापुनित पर्व है। इस दिन को देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग नामों से जाना जाता है, जिनमें त्रिपुरी, पूर्णिमा, गंगा स्नान आदि शामिल है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने का फल पूरे साल गंगा स्नान करने के बराबर होता है। कई जगहों पर इस देव दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के सहस्रनाम पाठ का विशेष महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
शास्त्रों में बताया गया है कि इसी दिन श्रीहरि विष्णु ने प्रलय काल दौरान वेदों की रक्षा करने के लिए पहला यानी मत्स्य अवतार लिया था। इसके अलावा भगवान शिव ने भी इसी दिन त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस के वध किए जाने के देवतागण काफी प्रसन्न हुए थे। इससे प्रसन्न होकर ही श्रीहरि विष्णु ने महादेव को त्रिपुरारी नाम दिया। इस कारण से इस तिथि को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के दौरान महादेव और कृतिकाओं की पूजा करने का विधान है। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, और अपने उपासकों पर आशीर्वाद की वर्षा करते है
कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
कार्तिक पूर्णिमा की तिथि: 27 नवंबर, 2023
पूर्णिमा तिथि शुरू: 26 नवंबर, 2023 दोपहर 15:53
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 27 नवंबर, 2023 को दोपहर 14:45 तक
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा वैदिक रिति रिवाजों से करने घर की सारी समस्याएं दूर हो जाती है, और मनुष्य को स्वास्थ्य व धन लाभ मिलता है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ऐसे करें पूजा
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर आप किसी नदी में स्नान करने में असमर्थ है, तो आप शुद्ध जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके बाद भगवान लक्ष्मी नारायण की आराधना करते हुए पूजा करें। जहां भगवान विष्णु की मूर्ति या फिर उनके चित्र के सामने घी का दीपक लगाएं, और विधि-विधान से पूजा करें। साथ ही भगवान सत्यनारायण की कथी सुनना भी आपके लिए लाभकारी होगा। कथा के समापन के पश्चात भगवान को खीर का भोग लगाकर प्रसाद वितरण करें। इसके बाद शाम के समय भगवान लक्ष्मी नारायण यानी विष्णु की पूजा कर, तुलसी जी की भी आरती उतारें। शाम के समय घर के बाहर और अंदर भी दीपक लगाना चाहिए। साथ ही अगर आप किसी जरूरतमंद को भोजन कराते हैं, तो वह सोने पर सुहागा होगा।
पूजा के दौरान ॐ सों सोमाय नम:, ॐ विष्णवे नमः, ॐ कार्तिकेय नमः, ॐ वृंदाय नमः, ॐ केशवाय नमः मंत्रों का जाप करें।
कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसे करें स्नान
कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान को काफी महत्वपूर्ण बताया गया है। अगर आप गंगा में इस दिन स्नान करते हैं, तो कहा जाता है कि यह पूरे साल गंगास्नान करने के बराबर होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन हाथ में कुशा लेकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद बाद भगवान नारायण की पूजा कर सत्यनारायण की कथा कहनी या फिर सुनना चाहिए। इस दिन शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। जिससे आपको सुखों की प्राप्ति होती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान का महत्व

हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन जप, तप व दान करने से बहुत पुण्य मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन दिया गया दान 10 यज्ञों के पुण्य के समान होता है। दान देते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि जिसे आप दान दे रहे हैं, वह जरूरतमंद हो। दान में फल, उड़द की दाल, कंबल, चावल आदि दे सकते हैं, इसे शुभ माना गया है।

 


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