प्रेरक प्रसंग अध्याय 5 : विश्‍वास की शक्ति | The Voice TV

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"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

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प्रेरक प्रसंग अध्याय 5 : विश्‍वास की शक्ति

Date : 31-Oct-2023

 भयंकर तूफान से गेलीलो झील का पानी बाँसों उछलने लगा | जो नावें चल रही थीं, वे बुरी तरह थरथराने लगीं | लहरों का पानी भीतर पहुँचने लगा तो यात्रियों के भय का पारावार रहा | एक नाव में एक कोने में कोई निर्द्वन्द्व व्यक्ति सोया पड़ा था | साथियों ने उसे जगाया | जगकर उसने तूफान को ध्यानपूर्वक देखा और फिर सथियों से पूछा, ‘आखिर इसमें डरने की क्या बात है ? तूफान भी आते हैं, नावें भी डूबती हैं और मनुष्य भी मरते ही हैं | इसमें क्या ऐसी अनहोनी बात हो गयी, जो आप लोग इतनी बुरी तरह हड़बड़ा रहे हैं ?’

          सभी यात्री उसका उत्तर सुनकर अवाक् रह गये | उस निर्द्वन्द्व व्यक्ति ने कहा, विश्वास की शक्ति तूफान से भी बड़ी है | तुम विश्वास क्यों नहीं करते  कि यह तूफान क्षण भर  बाद बंद हो जायेगा |’ भयभीत यात्रियों के उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना उस अलमस्त ने आँखें बंद कीं और अपने अंतर की झील में उतरकर पूरी शक्ति के साथ कहा, ‘शांत हो जा, मूर्ख !’ और तूफान तुरन्त शांत हो गया -सहमे हुए नटखट बच्चों की तरह नाव का हिलना भी बंद हो गया और यात्रियों ने चैन की साँस ली | अब उस अलमस्त यात्री -जीसस क्राइस्ट ने - यात्रियों से पूछा, ‘दोस्तों, जब विश्वास बड़ा है , तो तुमने तूफान को उससे भी बड़ा क्यों मान लिया था ?’ फिर बोले, ‘दिल से डर निकालकर हिम्मत को स्थान देना चाहिए, तभी हर कार्य में सफलता प्राप्त हो सकती है |’


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