शिक्षाप्रद कहानी : ऐसे मिलती है जीत | The Voice TV

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शिक्षाप्रद कहानी : ऐसे मिलती है जीत

Date : 07-Oct-2023

 

गोल के सामने हमारा गोल-रक्षक तैयार है | केंद्र में कप्तान संजीव अपने दाएं-अन्दर, दाएं-बाहर तथा बाएं-अंदर, बाएं-बाहर खड़े हुए आक्रामक खिलाड़ियों के साथ आक्रमन करने के लिए सतर्क है | इनके पीछे दो खिलाडी एक पंक्ति में हैं, जिनका काम विपक्षी  टीम से गेंद छीनकर इन्हें देना है | ये आक्रामक खिलाड़ियों की गोल में मदद करेंगे | इस पंक्ति के पीछे तथा गोलची के आगे खिलाड़ियों की एक पंक्ति और है |

 ये क्षेत्र-रक्षक हैं | ये विपक्षी टीम के खिलाड़ियों को गोल तक नहीं पहुंचने देंगे और गोलची की मदद करेंगे | प्रत्येक खिलाडी चुस्त है |

सीटी बजी | संजीव ने अपने हॉकी से गेंद को दाएं-अंदर खड़े पांडे की ओर फेंका और स्वयं आगे बढ़ गया | पांडे गेंद लेकर आगे बढ़ा |

आक्रामक पंक्ति के सभी खिलाडी विपक्षी-गोल की दिशा में आगे बढे | पांडे ने दाएं-बाहर बढ़ते हुए नीरज की तरफ गेंद फेंकी | नीरज  विपक्षी खिलाड़ियों से गेंद को बचाता हुआ मैदान के दाहिने कोने की ओर  भागा | विपक्षी टीम के दो खिलाड़ी बराबर उसका पीछा कर रहे थे | वह बड़ी सफाई से उनसे गेंद को काटता हुआ तेजी से कोने की ओर बढ़ रहा था |

अब संजीव ठीक विपक्षी टीम के गोल के सामने पहुंच चुका था | उसकी बाई ओर अंदर और बाहर की ओर उसके दो खिलाडी मौजूद थे | नीरज ने विपक्षी टीम के दोनों खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर तेजी से गेंद अंदर की ओर फेंकी | एक विपक्षी खिलाड़ी की हॉकी  स्टिक से टकराकर गेंद संजीव के दाहिने ओर गिरी | संजीव गेंद पर झपटा | उसने गेंद को हॉकी स्टिक से दबाया | इससे पहले कि कोई विपक्षी खिलाडी उससे गेंद छिनने झपटे उसने गेंद पर अपनी हॉकी से चोट की |

गेंद सभी खिलाड़ियों को पर करती, गोलची को धोखा देती सीधी गोल में जा घुसी | रैफरी की एक लम्बी सीटी बजते ही हमारे खिलाड़ियों में प्रसन्नता की लहर दौड गई | सभी ने हाथ मिलाकर चूमकर या गले लगाकर बारी-बारी से संजीव को बधाई दी |

 खेल पुनः शुरू हुआ | वही आक्रमण कभी दाई ओर से तो कभी बाई ओर से होता रहा | देखते-देखते संजीव ने तीन गोल कर दिए |

 विपक्षी खिलाड़ियों में मंत्रणा हुई | संजीव को गोल करने से नहीं रोका गया तो उनकी टीम की हार निश्चित है | विपक्षी टीम के एक क्षेत्र-रक्षक ने संजीव को रोकना चाहा | संजीव गेंद को बाएं फेंककर जैसे ही आगे बढ़ा कि क्षेत्र-रक्षक पीछे आया | उसने गेंद को रोकने का बहाना कर पूरे जोर से हॉकी उठाई, जो संजीव की बाई आंख के ऊपर जा टकराई | सजीव एक हाथ से आंख पकड़कर कराह उठा |

 उसके हाथ से हॉकी छुट गई | हॉकी की चोट से उसकी भौह फट गई | खेल रुक गया | रेफरी ने उस क्षेत्र-रक्षक को दस मिनट के लिए बाहर निकाल दिया | संजीव को बाहर ले जाया गया |  उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को मैदान में उतारा गया | खेल शुरू हुआ | हमारी टीम संजीव के बिना कमजोर पड़ गई | सजीव के बाहर आते ही विपक्षी टीम का हौसला बढ़ गया | उन्होंने बीस मिनट में हमारी टीम पर छह गोल कर दिए | मैच का आधा समय समाप्त हुआ | दस मिनट का विश्राम दिया गया |

संजीव की भौंह पर चार टांके आए | संजीव को जब टीम की कमजोर स्थिति का पता चला तो उसे बढ़ा दुःख हुआ | उसने टीम मैनेजर से कहा- ‘’सर, मैं मैदान में उतरना चाहता हूं |’’

            मैनेजर ने कहा – ‘’संजीव , तुन्हें चोट अधिक लगी है |

            तुम्हारा जाना ठीक नहीं है |’’

            संजीव ने अनुरोध किया- ‘’किन्तु टांके लगने के बाद मैं अपने आपको ठीक महसूस कर रहा हूँ | कृपया मुझे जाने दिजिये |’’

            मैनेजर ने डॉक्टर से पूछा –‘’ डॉक्टर  साहब, क्या संजीव खेलने जा सकता है ?’’

            डॉक्टर ने कहा –‘’ यदि टांके न टूटे तो कोई नुकसान नहीं है |’’

            संजीव ने उत्तर दिया- ‘’ डॉक्टर टांके टूट भी जाये तो आप दोबारा लगा दिजिएगा, पर मुझे रोकिए  नहीं, नहीं तो हमारी टीम हार जाएगी |’’

 संजीव की प्रार्थना सुन ली गई | आधे समय के बाद संजीव को मैदान में देखते ही हमारी टीम का हौसला बढ़ गया | विपक्षी खिलाड़ियों में निराशा छा गई | सबसे ज्यादा घबराहट उस खिलाड़ी में थी, जिसने संजीव पर हॉकी चलाई थी | केवल दस मिनट बाहर रहकर वह खेलने आ गया था | उसके मन में डर बैठ गया | संजीव बदला अवश्य लेगा | जब भी सजीव गेंद लेकर उस खिलाड़ी के सामने आता, वह डर से कांप जाता | संजीव आसानी से गेंद लेकर आगे बढ़ जाता | उसे गोल करने में अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ा | एक के बाद एक, संजीव ने चार गोल कर दिए |

विपक्षी टीम की आशा निराशा में बदलती चली गई और अंत में यह निराशा हार में बदल गई | सभी ने संजीव को कन्धों पर उठा लिया | संजीव को चोट न लगती तो शायद वह इतने गोल न कर पाता | संजीव ने चोट का बदला नहीं लिया | उसे चोट की चिंता नहीं थी, बल्कि उसे टीम की चिंता थी | अन्त में उसने टीम को विजय दिला ही दी |


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