गाँधीजी के सपने को पूरा किया है स्वच्छ भारत अभियान ने | The Voice TV

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गाँधीजी के सपने को पूरा किया है स्वच्छ भारत अभियान ने

Date : 02-Oct-2023
स्वस्थ और समृद्ध भारत के लिये गाँधीजी ने स्वच्छता को स्वतंत्रता आँदोलन में जोड़ा था । उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर गंदी बस्तियों में सफाई आरंभ की और लोगों को स्वच्छता के लिये प्रेरित किया । इसी बात आगे बढ़ाया प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने । उनके संकल्प और आव्हान से मानों सभी प्रांतों में स्वच्छता की एक स्पर्धा आरंभ हो गई । जिसमें मध्यप्रदेश एक अग्रणी प्राँत के रूप में उभरा ।
 
स्वच्छता है तो स्वास्थ्य है और स्वास्थ्य है तो समृद्धि है । यह वाक्य भारतीय वाड्मय में जीवन का सिद्धांत रहा है । गंदगी से उत्पन्न रोग केवल शरीर को ही अस्वस्थ्य नहीं बनाते अपितु मन को भी बनाते हैं। कमजोर शरीर मन को भी निराश बनाता है । कमजोर शरीर और निराश मन से कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता । इसलिए प्रगति और समृद्धि के लिये स्वच्छता सबसे पहली सीढ़ी मानी गई है । भारतीय इतिहास के विवरण में स्वच्छता पर सर्वाधिक जोर दिया गया था । शरीर, घर आँगन ही नहीं गली मोहल्लों की सफाई, कुँए, तालाबों नदियों की सफाई के तरीके भारतीय साहित्य में भरे पड़े हैं लेकिन मध्यकाल की उथल पुथल से पूरी जीवन शैली तहस नहस हो गई थी । और समाज मानों गरीबी और गंदगी के नारकीय जीवन में धँसता चला गया । इस बात को गाँधी जी ने समझा और उन्होंने अपने विभिन्न अभियानों के साथ सफाई को भी जोड़ा। गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका से लौटकर सीधे स्वतंत्रता आँदोलन से नहीं जुड़ गये थे । पहले उन्होंने पूरे भारत की यात्रा की, लोगों से मिले और भारत की समस्याओं एवं उनके समाधान का आकलन किया । इसलिए गाँधी जी ने अपने जीवन में जितना संघर्ष अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिये किया उससे कही॔ अधिक भारतीयों में सामाजिक, सांस्कृतिक आर्थिक और मानसिक चेतना जगाने के लिये किया । गाँधीजी जब भारत लौटे तब देशवासी महामारी से जूझ रहे थे । भूख और गरीबी थी सो अलग । इसलिये उन्होंने जीवन की आत्म निर्भरता पर जोर दिया । यदि आबादी का अनुपात देखें तो तब भारत का नगरीयकरण केवल दस प्रतिशत था । नब्बे प्रतिशत जनसंख्या का संबंध गावों से था और अर्थ व्यवस्था में लगभग इतना ही अनुपात कृषि और वनोपज का था । इसलिये उन्होंने स्वतंत्रता आँदोलन के साथ ग्राम स्वराज एवं कुटीर उद्योग पर जोर दिया । उनका स्पष्ट मत था कि कमजोर और बीमार तन मन से कृषि और उद्योग की सफलता संभव नहीं है । इसके लिये समाज का स्वस्थ्य और सक्रिय होना आवश्यक है । और इसका आधार स्वच्छता है । गाँधी जी के इस कथन का सत्यापन हम अपने आसपास देखकर कर सकते हैं। कितने कीट, पतंग, मच्छर मख्खी और अन्य वेक्टीरिया केवल गंदगी से पैदा होते हैं और हमें बीमार बना देते हैं। यदि हम सफाई रखेंगे तो मानकर चलिये कि अस्सी प्रतिशत बीमारियों पर काबू पा सकेंगे ।
 
समाज में जागरण के लिये गाँधीजी ने स्वयं झाड़ू उठाई और गंदी बस्तियों में स्वच्छता का अभियान चलाया । गाँधी के इ स्वच्छता संकल्प को आगे बढ़ाने के लिये स्वतंत्रता के बाद की विभिन्न सरकारों ने स्वच्छता और गंदी बस्ती उन्मूलन की नीतियाँ बनाईं पर वे योजनाएँ कोई अभियान का रूप न ले सकीं । अतीत के अनुभवों से सबक लेकर वर्तमान प्रधान मंत्री श्री नरेंद्रमोदी ने स्वच्छता अभियान को एक आँदोलन के रूप चलाया और इसमें निरन्तरता बनाये रखने के लिये कुछ ऐसे कार्यक्रम घोषित किये जिससे विभिन्न प्रांतों और नगरों के बीचस्वच्छता ने अभियान एक स्पर्धा का स्वरूप ले लिया। मोदी जी ने अपना पद संभालते ही दो अक्टूबर 2014 इस अभियान की शुरुआत की । वे गाँधी जयंति पर गाँधी जी की ही भाँति झाड़ू लेकर निकले और लोगों से सहभागिता का आव्हान किया । 

मोदी जी के स्वच्छता अभियान की शुरुआत -

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत बनाने के अपने अभियान की शुरुआत दिल्ली के इंडिया गेट से की । उन्होंने हाथ में झाड़ू लेकर न केवल गाँधी जी की भाँति स्वयं झाड़ू लगाई अपितु एक प्रतिज्ञा समारोह भी आयोजित किया । इसमें देश भर के लगभग 50 लाख लोगों ने भाग लिया लिया । इनमें अधिकांश सरकारी कर्मचारी थे । मोदी जी ने इस अवसर पर राजपथ झंडी दिखा कर एक पदयात्रा भी रवाना की जिसमें काफी दूर तक वे स्वयं भी चले । स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत करते हुए मोदी जी ने 2019 तक का लक्ष्य निर्धारित किया । 2019 गाँधी जी की 150 वीं जयंति थी इसलिए मोदी जी ने इस वर्ष को स्वच्छ भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था और कहा कि “एक स्वच्छ भारत के द्वारा ही देश 2019 में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर अपनी सर्वोत्तम श्रद्धांजलि दे सकते हैं।” श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गाँधी लोगों को न तो स्वयं गंदगी फैलानी चाहिए और न ही किसी और को फैलाने देना चाहिए। उन्होंने “न गंदगी करेंगे, न करने देंगे।” का मंत्र भी दिया। यह शपथ भी दिलाई। श्री नरेन्द्र मोदी ने जिन लोगों को स्वच्छता अभियान में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया और उनसे यह अनुरोध किया वो अन्य लोगों को इस पहल में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
 
उन्होंने स्वयं रुचि लेकर इस स्वच्छता अभियान को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया । यह दो चरणों में आरंभ हुआ । पहले चरण में नगरीय क्षेत्र में और दूसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में आरंभ हुआ । इस अभियान की शैली कुछ ऐसी थी कि यह केवल आव्हान अथवा औपचारिक भर नहीं रहा अपितु जन सामान्य के बीच उत्तरदायित्व  का भाव जागा । और प्रत्येक नागरिक स्वच्छता कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ गया । प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने स्वयं आगे रहकर इसे पूरे भारत में फैलाया ।  उन्होंने दिल्ली के बाद वाराणसी में भी स्वच्छता अभियान चलाया। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत गंगा नदी के निकट असीघाट पर फावड़ा चलाया। उनके साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी सहभागी बने । जन चेतना और सहभागिता  बढ़ाने के लिये प्रतिवर्ष स्वच्छता पखवाड़ा आरंभ किया जो प्रतिवर्ष 17 सितम्बर से दो अक्टूबर तक रहता है । 
 
मोदीजी ने अपना अभियान केवल घर आँगन, गली मोहल्ले की स्वच्छता तक सीमित न रखा इसके साथ खुले में शौच करने के वातावरण को भी बदलने का बीड़ा उठाया । चूँकि खुले में शौच करना न केवल मानवीय गरिमा के विपरीत है अपितु खुले में पड़ी इस गंदगी से बीमारी के कीट पतंग और वेक्टीरिया भी जन्म लेते हैं । मोदी जी ने खुले में शौच रोकने के लिये हर घर में शौचालय की योजना बनाई। असंभव सा लगने वाले इस कार्य को पूरा करने के लिये ग्रामीण क्षेत्र में एक जन आंदोलन चलाकर पूरा किया गया । इसे दुनिया का सबसे बड़ा परिवर्तन कार्यक्रम माना गया है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की संकल्प शक्ति और उनके आव्हान पर समाज में आई चेतना का परिणाम था कि ग्रामीण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत 2019 तक निर्धारित लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा हो गया । इस अभियान के अंतर्गत पूरे देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.28 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए । 02 अक्टूबर 2019 तक, भारत के सभी जिले खुले में शौच मुक्त हो गये ।

मध्यप्रदेश ने बनाया कीर्तिमान -

देश भर में चले इस स्वच्छ भारत अभियान में मध्यप्रदेश ने अनेक कीर्तिमान बनाये । नगरों ने स्वच्छता की स्पर्धा जीती और ग्रामों ने समय से पहले अपने लक्ष्य पूरे किये । इसका कारण मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की व्यक्तिगत रुचि थी । मोदी जी ने स्वच्छता अभियान 2014 में आरंभ किया था पर मध्यप्रदेश में शिवराज जी ने अपने पहले कार्यकाल से ही नदियों और तालाबों की सफाई से इसकी शुरुआत कर दी थी । वे स्वयं विभिन्न नगरों के नदियों तालाबों में फावड़े लेकर निकले और सफाई आरंभ की थी । इससे पूरे प्रदेश में चेतना जागी । और जब मोदी जी का स्वच्छ भारत अभियान आरंभ हुआ तो मानों प्रदेशवासी इसकी प्रतीक्षा ही कर रहे थे । मध्यप्रदेश न केवल नगरों और गांवों की स्वच्छता में अग्रणी रहा अपितु सूखे और गीले कचरे निपटान में भी रिकार्ड बनाये । खुले में शौच रोकने, अपशिष्‍ट का सुरक्षित का प्रबंधन एवं निपटान के जो लक्ष्य 2019 तक के थे वे 2017 के अंततक लगभग पूरा कर लिये गये थे । इस अभियान के अंतर्गत गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले 3311313 घरों  में शौचालयों और छोटे बच्चों के लिये 50263 अतिरिक्त शौचालयों का निर्माण हुआ । गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को बारह हजार रुपये का अनुदान भी दिया गया ।समग्र स्वच्छता अभियान के तहत कुल 422.55 करोड़ व्यय हुये । ग्रामीण क्षेत्र के हर स्कूल में शौचालय बने, इंदौर नगर ने स्वच्छता अभियान में लगातार छै वर्षों तक देश में प्रथम स्थान बनाया । 
 
शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के मामले में मध्य प्रदेश का प्रदर्शन पश्चिम जोन में अच्छा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण वर्ष 2022 में मध्य प्रदेश को उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जिलों में प्रथम स्थान भोपाल और तृतीय स्थान इंदौर को मिला है। प्रदेश को गंदे पानी के प्रबंधन के लिए सुजलाम अभियान के पहले चरण में प्रथम और दूसरे चरण में चौथा स्थान मिला है।
 
वर्ष 2022 के स्वच्छता सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश को 16 राष्ट्रीय अवार्ड मिले । 99 नगरीय निकायों को स्टार रेटिंग मिली । वर्ष 2021 में 27 शहरों को स्टार रेटिंग मिली थी। भोपाल को 5 स्टार मिले और देश की स्वच्छ संवहनीय राजधानी का अवार्ड भी भोपाल को मिला। इंदौर प्रथम 7 स्टार रेटिंग नगर बना। उज्जैन को एक लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी के नगरों में सर्वश्रेष्ठ नागरिक सहभागिता का सम्मान मिला।
 
इसके अतिरिक्त एक से तीन  लाख तक की जनसंख्या वाले नगरों में छिदवाड़ा को सिटीजन फीडबेक का अवार्ड मिला और 15 से 25 हजार तक की जनसंख्या वाले नगरों की श्रेणी में स्व-संवहनीय शहर का सम्मान अशोकनगर जिले के मुंगावली को, पचास हजार से एक लाख तक जनसंख्या के नगरों में स्व-संवहनीय अवार्ड खुरई और देश के तीसरे सबसे स्वच्छ कैंट का अवार्ड महू कैंट को मिला । 
 
 पश्चिम जोन में 15 हजार से 25 हजार जनसंख्या श्रेणी में औबेदुल्लागंज को, 15 हजार से कम जनसंख्या श्रेणी में फूफकला को, 15 हजार से 25 हजार जनसंख्या की श्रेणी में नवाचार अवार्ड पेटलावद को और एक लाख से कम जनसंख्या के नगरों में देश में सबसे अधिक नागरिक सहभागिता का अवार्ड बड़ौनी को मिला। उत्तम प्रदर्शन के लिये उज्जैन और खजुराहो को नेशनल अवार्ड भी मिले । मध्यप्रदेश की इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने मध्यप्रदेश को बधाई दी और गत वर्ष दो अक्टूबर 2022 को सम्मानित किया । उन्होंने विशेषकर इंदौर को छठवीं बार स्वच्छतम शहर का अवार्ड मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और  जन भागीदारी के प्रयास को अनुकरणीय बताया।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में आरंभ किये स्वच्छ भारत अभियान का जो स्वरूप अब उभर कर आया इसी कल्पना लगभग सौ वर्ष पहले गाँधी जी ने की थी । देश की स्वतंत्रता प्राप्त करना जितना संघर्षमय होता है उससे कहीं अधिक उस स्वतंत्रता को बनाये रखने केलिये पुरुषार्थ करना आवश्यक होता है । इसके लिये स्वस्थ तन और मन की आवश्यकता है जिसका आधार स्वच्छता है । वर्ष 2014 के स्वच्छता अभियान के बाद भारत जैसे जैसे आगे बढ़ा वैसे वैसे विश्व  में भारत का सम्मान और समृद्धि भी बढ़ी जो इसका इस अभियान की उपयोगिता और महत्व का स्पष्ट प्रमाण है । 

लेखक- रेशम शर्मा


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