पुराणों की मानें तो महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना के लिए श्री गणेश का आह्नान किया था। लेकिन वाणी ,ज्ञान,बुद्धि और समृद्धि के देवता गणेश जी ने महाभारत की रचना को लिपिबद्ध किया था ।अनंत चतुर्दशी के दिन उनका विसर्जन किया जाता है।
भारत में देखा जाए तो हर त्योहार महत्वपुर्ण है इसमें से गणेश चतुर्थी है । पूरे भारत वर्ष में धूम-धाम से मनाया जाता है । गणेश जी को स्थापित किया जाता है और बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ गणपति जी के देख-भाल और पूजा अर्चना किया जाता है। गणेश जी को 10 दिन के लिए स्थापित किया जाता है इन दस दिनों में गणपति जी से लोगो को लगाव हो जाता है , जब गणेश जी अपने साथ सुख लेकर आते है। और दुःख लेकर जाते है तथा 11 दिन उनका विसर्जन किया जाता है।
कथा
गणेश विसर्जन के पीछे महर्षि वेदव्यास की प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना के लिए श्री गणेश का आह्नान किया तथा गणेश जी ने उनका प्राथना को । तब गणेश जी ने महर्षि वेदव्यास जी सामने एक शर्त रखी और कहा कि , " की प्रण लो " मैं जब लिखना प्रारम्भ करूँगा तो कलम को रोकूंगा नहीं और यदि कलम रुक गई तो लिखना बंद कर दूंगा। तब देवव्यास जी ने कहा कि प्रभु आप देवताओं में विद्यमान हैं ,विद्या और बुद्धि के दाता हैं और में एक साधारण ऋषि हूं। यदि किसी श्लोक में मुझसे गलती हो जाये तो आप उस श्लोक को ठीक कर के लिपिबद्ध करे।
इस प्रकार गणेश जी ने वेदव्यास के कहने पर महाभारत लिखना शुरू कर दिये। वह दिन रात मेहनत करते रहे। इतनी मेहनत के बाद गणेश जी को थकान होने थी। इस महा ग्रन्थ की रचना करते समय उनको पानी पीना भी वर्जत था। जिससे धीरे-धीरे उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगा ,यह देख ऋषि वेदव्यास जी ने उनके शरीर में मिट्टी का लैप लगाया और भाद्रपद के शुल्क पक्ष पर गणेश जी का पूजा अर्चना किया गया। मिट्टी के लैप धीरे-धीरे सूखने लग जाते है जिससे उनका सारा शरीर अकड़ जाता है। तथा गणेश जी के इस रूप को पार्थिव भी कहा जाता है।
10 दिन तक महाभारत का लेखन कार्य चला। और अनंत चतुर्दशी के दिन संपन्न हुआ। महर्षि वेदव्यास ने देखा की गणेश जी के शरीर तापमान बड़ा हुआ है तथा वह जो गणेश जी को जो मिट्टी का लेप लगा था वह भी सूख कर झड़ने लगे थे। यह देख वेदव्यास जी ने गणेश जी को पानी में डाल दिए ,और इस दिन वेदव्यास जी गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न प्रकार की भोजन करवाए।
इस लिए गणेश जी की मिट्टी के पार्थिव मूर्ति बनाया जाता है और गणेश जी की 10 दिन तक पुरे श्रद्धा-भक्ति से पूजा पाठ किया जाता है और उसके 10 दिन पश्चात उनका विसर्जन किया जाता है।
कहा जाता है की श्री गणेश को घर पर स्थापित करने से घर के सारे कष्ट दूर हो जाते है। और घर में सुख समृद्धि आती है।
इतिहास पर गौर करें तो कहा जाता है कि पेशवाओं ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया था। शिवजी महाराज की माँ जीजाबाई ने पुणे में कस्बा गणपति नाम से प्रसिद्ध गणपति की स्थापना की थी। लेकिन सन 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव की शुरुवात हुई।
