सांगीतिक सभाओं के कलाकार तय, देश-विदेश से ब्रम्हनाद के साधक आएंगे तानसेन को स्वरांजलि देने
ग्वालियर, 09 दिसंबर (हि.स.)। गान महर्षि तानसेन की स्मृति में आयोजित होने वाले तानसेन समारोह'' के अपने अलग ही रंग हैं। विश्व संगीत समागम “तानसेन समारोह” की तैयारियां जारी हैं। संगीतधानी ग्वालियर में समारोह के तहत आयोजित होने वाली संगीत सभाओं के साथ-साथ शिवपुरी, दतिया और बटेश्वर की संगीत सभाओं के कलाकारों के नाम भी तय हो गए हैं। समारोह के शुभारंभ दिवस को सुबह तानसेन की समाधि पर सामाजिक समरसता के सजीव दर्शन होते हैं। इस बार 19 दिसंबर को सुबह पारंपरिक रूप से हरिकथा, मीलाद, शहनाई वादन एवं चादरपोशी के साथ तानसेन समारोह'' का पारंपरिक शुभारंभ होगा।
संगीत शिरोमणि तानसेन की याद में आयोजित शास्त्रीय संगीत का यह सालाना महोत्सव शताब्दी वर्ष की दहलीज के नज़दीक पहुंच चुका है। इसको ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप एवं संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर के निर्देशन में समारोह का विस्तार किया गया है। इस बार संगीत की नगरी ग्वालियर के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल अंचल के ऐतिहासिक स्थलों को भी समारोह से जोड़ा गया है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव तानसेन समारोह का इस साल 98वां वर्ष है।
तानसेन समारोह इस साल संगीत नगरी ग्वालियर में 19 से 23 दिसंबर तक आयोजित होगा। समारोह का 19 दिसंबर को सायंकाल औपचारिक शुभारंभ होगा और तानसेन अलंकरण प्रदान किया जाएगा। समारोह के शुभारंभ से तीन दिन पहले से पूर्वरंग “गमक” की सभाएं भी होंगीं। तानसेन समारोह के तहत गमक की पहली सभा 16 दिसंबर को शिवपुरी में आयोजित होगी। इसके बाद 17 दिसंबर को दूसरी सभा दतिया में और ग्वालियर के इंटक मैदान में 18 दिसंबर को सायंकाल पूर्वरंग “गमक” की सभा सजेगी, जिसमें सुविख्यात सूफी गायक हंस राज हंस की प्रस्तुति होगी।
समारोह के तहत 22 दिसंबर को एक सभा मुरैना जिले के अंतर्गत ग्राम पढ़ावली के समीप स्थित ऐतिहासिक स्थल बटेश्वर मंदिर प्रांगण में सजेगी। यह सभा शास्त्रीय संगीत की रहेगी। इस साल के तानसेन समारोह में भी देश एवं विदेश से आ रहे ब्रम्हनाद के शीर्षस्थ साधक गान मनीषी तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। इस बार के समारोह में “गमक” की तीन सभाओं के अलावा कुल 10 संगीत सभाएं होंगी। पहली 7 संगीत सभायें सुर सम्राट तानसेन की समाधि एवं मोहम्मद गौस के मकबरा परिसर में भव्य एवं आकर्षक मंच पर सजेंगीं। आठवीं एवं प्रात:कालीन सभा सुर सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में 23 दिसंबर को झिलमिल नदी के किनारे सजेगी। किला परिसर स्थित गूजरी महल में समारोह की नौवीं एवं आखिरी संगीत सभा 23 दिसंबम्बर को सायंकाल आयोजित होगी।
तानसेन समारोह की प्रात:कालीन संगीत सभाएं प्रात: 10 बजे और सायंकालीन सभाएं सायंकाल 6 बजे शुरू होंगीं। संगीत सभाओं में प्रस्तुति देने आ रहे कलाकारों का ब्यौरा इस प्रकार है –
पूर्वरंग “गमक” शिवपुरी (16 दिसंबर)
तानसेन समारोह के विस्तार के तहत शिवपुरी में 16 दिसंबर को “गमक” की पहली सभा होगी। इस सभा में देश की सुविख्यात उप शास्त्रीय गायिका मालिनी अवस्थी लखनऊ की प्रस्तुति आकर्षण का केन्द्र होगी। इस सभा में इनके अलावा देवेन्द्र राजपूत ग्वालियर का ध्रुपद गायन, स्नेहलता सिंघल ग्वालियर का सितार वादन एवं ध्रुपद गुरू अभिजीत सुखदाणे ग्वालियर की प्रस्तुति होगी।
पूर्वरंग “गमक” दतिया (17 दिसंबर)
समारोह के तहत 17 दिसंबर को दतिया में पूर्वरंग “गमक” की दूसरी सभा सजेगी। इस सांगीतिक सभा में हर्षवर्धन दुबे दतिया का गायन, जनाब अफ़जल हुसैन भोपाल का ध्रुपद गायन, संस्कृति–प्रकृति बहाने उज्जैन की सितार–संतूर जुगलबंदी और आस्था गोस्वामी मथुरा का गायन होगा।
“गमक” में सुविख्यात सूफियाना गायक हंस राज हंस की प्रस्तुति
विश्व समागम तानसेन समारोह की पूर्व संध्या 18 दिसंबर को सायंकाल 7 बजे हजीरा चौराहे के समीप स्थित इंटक मैदान में उप शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम पूर्वरंग “गमक” होगा। गमक में पंजाब के सुविख्यात सूफियाना गायक हंस राज हंस की प्रस्तुति होगी। हंस राज हंस ऐसे सूफियाना गायक हैं, जिन्होंने सूफियाना गायकी के साथ-साथ शास्त्रीयता पर आधारित गानों के माध्यम से नई विधा पेश की है। उन्होंने फिल्मों में भी “तेरे बिन नईं जीना मरजाना…”, “खुदा आसमां नीचे…”, “टोटे-टोटे हो गया…” जैसे गाने पेश कर सुगम संगीत के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाई है।
ग्वालियर में “गमक” की सभा से पहले लोक कला यात्रा निकलेगी
गमक की सभा शुरू होने से पहले शाम 5 बजे से गूजरी महल किलागेट से भव्य लोक कला यात्रा निकाली जाएगी। इसमें लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ेंगे। यह यात्रा किला रोड व हजीरा होते हुए गमक आयोजन स्थल अर्थात इंटक मैदान पहुंचेगी।
संगीत सभा बटेश्वर 22 दिसंबर (प्रात:काल)
विवेक नवले इंदौर का तबला वादन, साधना गोरे ग्वालियर का गायन व प्रभात कुमार दिल्ली का सरोद वादन होगा।
सायंकालीन सभा 19 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
सभा का शुभारंभ पारंपरिक रूप से शासकीय माधव संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा। इस सभा में तानसेन सम्मान से विभूषित कलाकार पं. नित्यानंद हल्दीपुर मुम्बई बाँसुरी वादन प्रस्तुत करेंगे। इस सभा में ख्यातिनाम गायक जनाब वासिफुद्दीन डागर दिल्ली का ध्रुपद गायन और देश की सुविख्यात शास्त्रीय गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े देशपांडे पुणे का गायन होगा।
प्रात:कालीन सभा 20 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
इस सभा का शुभारंभ शंकर गंधर्व संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा। सभा में दीपिका भिड़े भागवत मुम्बई का गायन, डालचंद शर्मा दिल्ली का पखावज वादन, फड़के देशपाण्डे पुणे का गायन और ब्रजभूषण गोस्वामी दिल्ली के ध्रुपद गायन की प्रस्तुति होगी।
सायंकालीन सभा 20 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
इस सभा का आरंभ शंकर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगा। इस सभा में धानी गुंदेचा भोपाल का ध्रुपद गायन, व्यंकटेश कुमार धारवाड़ का गायन, विश्व मोहन भट्ट एवं सलिल भट्ट जयपुर का मोहनवीणा वादन एवं सुषमा वाजपेयी कानपुर का गायन होगा।
प्रात:कालीन सभा 21 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
इस सभा के आरंभ में तानसेन संगीत महाविद्यालय ग्वालियर की ध्रुपद प्रस्तुति होगी। इसके बाद सुखदेव चतुर्वेदी मुम्बई का ध्रुपद गायन, अभिषेक बोरकर पुणे का सरोद वादन, आनंद भाटे पुणे का गायन एवं प्रवीण शेवलीकर भोपाल के वायोलिन वादन की प्रस्तुति होगी।
सायंकालीन सभा 21 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
इस सभा की शुरुआत ध्रुपद केन्द्र ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी। इसके बाद विदुषी परवीन सुल्ताना मुम्बई का गायन, संतोष संत इंदौर का बांसुरी वादन, राजेश सेंध मुम्बई का ध्रुपद गायन एवं श्रीराम उमड़ेकर ग्वालियर का सितार वादन होगा।
प्रात:कालीन सभा 22 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
सभा की शुरुआत पारंपरिक रूप से सारदा नाद मंदिर ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी। इसके बाद विनोद मिश्रा सतना का गायन, दिनेश शुक्ला इंदौर का तबला वादन, उमेश कंपूवाले ग्वालियर का गायन एवं हर्ष नारायण मुम्बई का सारंगी वादन होगा।
सायंकालीन सभा 22 दिसंबर-तानसेन समाधि स्थल
इस सभा का शुभारंभ भारतीय संगीत महाविद्यालय के ध्रुपद गायन से होगा। इसके पश्चात अनुजा झोकरकर पुणे का गायन, शशांक सुब्रमण्यम चैन्नई का बांसुरी वादन, जयतीर्थ मेवुण्डी धारवाड़ का गायन और संजू सहाय लंदन (वाराणसी) का तबला वादन होगा।
प्रात:कालीन सभा 23 दिसंबर–बेहट
सभा के प्रारंभ में ध्रुपद केन्द्र बेहट का ध्रुपद गायन होगा। इसके बाद हरविंदर सिंह चंडीगढ़ का गायन, विनय बिन्दे एवं प्रणय पराड़कर ग्वालियर की तबला जुगलबंदी और आदित्य शर्मा ग्वालियर की ध्रुपद गायन प्रस्तुति होगी।
अंतिम संगीत सभा (सायंकाल)–23 दिसंबर, गूजरी महल
सभा की शुरुआत साधना संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी। इसके पश्चात शिल्पा मसूदकर इंदौर का गायन, अनुप्रिया देवताले इंदौर का वायोलिन वादन और रीता देव दिल्ली का गायन होगा।