संयुक्त राष्ट्र में एनजीओ की हैसियत से शामिल हुआ था कैलासा
संयुक्त राष्ट्र, 2 मार्च (हि.स.)। यौन शोषण मामले में आरोपित भगोड़े नित्यानंद की प्रतिनिधि विजयप्रिया के संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ बयान को किसी भी तरह की तवज्जो नहीं दी जाएगी। इसका कारण यह है कि इस बैठक में एनजीओ की तरफ से भाग लेने पहुंचीं थीं, न कि किसी देश की तरफ से। यह बात संयुक्त राष्ट्र ने अपने एक वक्तव्य कही है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि विजयप्रिया के बयान पर न तो विचार नहीं किया जाएगा और ना ही संबंधित समिति के समक्ष विचार के लिए भेजा जाएगा।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र की बैठक में नित्यानंद की प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुईं विजयप्रिया ने भारत के खिलाफ जहर उगला था और नित्यानंद को हिंदू धर्म का सर्वोच्च गुरु बताया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की समिति ने कहा कि यूएन की बैठक में नित्यानंद का देश ‘कैलासा’ एक एनजीओ के रूप में शामिल हुआ था। समिति ने कहा कि नित्यानंद की प्रतिनिधि विजयप्रिया ने यहां जो कुछ भी कहा, उस पर विचार नहीं किया जाएगा और ना ही संबंधित समिति के समक्ष भेजा जाएगा।
कैलासा की प्रतिनिधि विजयप्रिया ने 24 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर आयोजित एक बैठक में हिस्सा लिया था। नित्यानंद ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। उसने संयुक्त राष्ट्र बैठक में शामिल विजयप्रिया की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘यूनाइटेड स्टेट ऑफ कैलासा की प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर आयोजित एक बैठक में हिस्सा लिया।
बता दें कि भगोड़ा नित्यानंद पर भारत में रेप और अपहरण के आरोप हैं। 2019 में वह देश छोड़कर भाग गया था। इसके बाद उसने यूनाइटेड स्टेट ऑफ कैलासा बनाने का दावा किया।
