मेदिनीपुर, 24 जनवरी । पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के अंतर्गत चंद्रकोणा-एक ब्लॉक के निश्चिंतपुर गांव में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में गहरा रोष है। विद्यालय भवन और छात्र होने के बावजूद शिक्षक की अनुपस्थिति के कारण पिछले दो वर्षों से निश्चिंतपुर शिशु शिक्षा केंद्र बंद पड़ा है। इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि शीघ्र शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई, तो वे आगामी मतदान प्रक्रिया का पूर्ण बहिष्करण करेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनोहरपुर-एक पंचायत के इस शिक्षा केंद्र में लगभग साठ छात्र अध्ययनरत थे। यह विद्यालय एकमात्र शिक्षक तरुण पाल के सहारे संचालित हो रहा था, जो वर्ष दो हजार चौबीस में सेवानिवृत्त हो गए। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद किसी अन्य शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे विद्यालय पिछले दो वर्षों से पूरी तरह बंद है। वर्तमान में बच्चों को पढ़ाई के लिए गांव से पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिसके कारण कई बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है।
विद्यालय बंद होने के बावजूद ग्रामीणों ने अपनी परंपरा को जीवित रखा है। इस वर्ष भी ग्रामीणों ने स्कूल के समीप स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र में शुक्रवार के दिन सरस्वती पूजा का आयोजन किया। ग्रामीण ज्योत्स्ना मल्लिक ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पूजा तो जारी है, लेकिन बिना शिक्षक के विद्यालय की स्थिति देखकर मन व्यथित हो जाता है। विद्यालय की मध्यान्ह भोजन रसोइया सरस्वती मल्लिक, जिनकी आजीविका भी समाप्त हो गई है, ने सवाल उठाया कि केवल एक शिक्षक की नियुक्ति से ही यह समस्या सुलझ सकती है, लेकिन संबंधित अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मधुमिता मल्लिक और भरत दोलोई सहित अन्य ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि वे अब किसी राजनीतिक दल या प्रशासनिक आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि चुनाव से पहले विद्यालय पुनः आरंभ नहीं हुआ, तो गांव का कोई भी मतदाता मतदान में भाग नहीं लेगा। ग्रामीणों ने ‘पहले स्कूल, फिर वोट’ का नारा भी दिया है।
शनिवार सुबह इस विषय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा के मंडल अध्यक्ष सबुज मजूमदार ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में आठ हजार से अधिक विद्यालय बंद हो चुके हैं और जनता को इसका जवाब देना होगा। वहीं, ब्लॉक तृणमूल अध्यक्ष सूर्यकांत दोलोई ने कहा कि यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है और शीघ्र ही कम से कम एक शिक्षक की व्यवस्था कर विद्यालय को पुनः चालू करने का प्रयास किया जा रहा है।
