वाराणसी, 24 जनवरी । उत्तर प्रदेश की मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी)के महाश्मशान मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट पर अब आने वाले शवों के आंकड़ों को व्यवस्थित करने और परिजनों की सुविधा के लिए नगर निगम ने बड़ी पहल की है।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने शुक्रवार शाम हरिश्चंद्र घाट पर फीता काटकर 'नि:शुल्क मृत्यु पंजीकरण' व्यवस्था का विधिवत शुभारंभ किया। अब दोनों महाश्मशान घाटों पर कंप्यूटरीकृत नि:शुल्क पंजीकरण की व्यवस्था शुरू हो गई है। इस व्यवस्था के लागू होने से अब काशी के दोनों महाश्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों का सटीक और वास्तविक आंकलन संभव हो सकेगा। यह जानकारी नगर निगम के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी। बताया गया कि पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है। इसका उद्देश्य केवल शहर के मुख्य घाटों पर होने वाले दाह संस्कार का सही आंकड़ा प्राप्त करना है। परिजनों को केवल मांगी गई जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसके लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं करना होगा। पंजीकरण पर्ची से मत्यु प्रमाणपत्र निर्गत कराने में सहूलियत होगी।
महापौर अशोक तिवारी के अनुसार नगर निगम केवल श्मशान घाटों तक ही सीमित नहीं है। निगम द्वारा मुस्लिम और ईसाई समाज के लिए शहर के 12 बड़े कब्रिस्तानों को चिन्हित किया गया है। इन कब्रिस्तानों पर भी शीघ्र ही मृत्यु पंजीकरण की कंप्यूटरीकृत व्यवस्था प्रारंभ की जाएगी, जिससे शहर के हर वर्ग को इस सुविधा का लाभ मिल सके।
महापौर के अनुसार अब तक घाटों पर आने वाले शवों की संख्या का कोई सटीक सरकारी रिकॉर्ड मौके पर दर्ज नहीं होता था। इसे व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम ने कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाई है। यह कर्मचारी चौबीस घंटे घाट पर मौजूद रहेंगे और आने वाले प्रत्येक मृतक का नाम, पता और आयु जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज करेंगे। इस नई व्यवस्था से घाटों पर होने वाले अंतिम संस्कारों के प्रबंधन में आसानी होगी। साथ ही निगम के पास अपना एक विश्वसनीय डेटाबेस होगा, जो भविष्य की योजनाओं और नगरीय व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।
काशी के घाटों पर शवदाह के पंजीकरण की व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है। हरिश्चंद्र घाट पर निगम ने शुक्रवार शाम पहली डिजिटल शवदाह पर्ची (पंजीकरण संख्या: 2026-HARI-00001) सोनभद्र के लवकुश शर्मा (18 वर्ष) को जारी किया।
