प्रयागराज, 27 नवम्बर (हि.स.)। श्रीमद्ज्योतिष्पीठोद्धारक जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज की 150वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में ‘आराधना महोत्सव’ 29 नवम्बर से 08 दिसम्बर तक आयोजित है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत करेंगे। यह जानकारी जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने अलोपी बाग स्थित अपने मठ में पत्रकारों को दी।
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ने बताया कि ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान आदिशंकराचार्य ने देश के उत्तर दिशा में ज्यातिर्मठ, पश्चिमी में शारदामठ, दक्षिणी में श्रृंगेरीमठ एवं पूर्वी दिशा में गोवर्धनमठ की स्थापना की। चारों मठों में एक-एक प्रमुख आचार्य मनोनीत किया। बताया कि ज्योतिष्पीठ प्राकृतिक एवं अन्य आपदाओं के कारण 1833 से 1998 तक पूजा-अर्चना से बाधित रहा। 12 जून 1953 को शान्तानंद को शंकराचार्य बनाया गया। उनके बाद विष्णुदेवानंद और तत्पश्चात् 14-15 नवम्बर 1989 में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को शंकराचार्य बनाया गया।
शंकराचार्य ने ‘आराधना महोत्सव’ के बारे में बताया कि प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से श्रीरूद्रयज्ञ, 7 बजे से 12 बजे तक श्रीरामचरितमानस गायन, 2 बजे से 6 बजे तक श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा एवं आरती होगी और सायं सात बजे से रूद्राभिषेक होगा।
उन्होंने बताया कि ब्रह्मानंद सरस्वती का 150वीं जयंती महोत्सव एवं राधामाधव वार्षिक पाटोत्सव 03 दिसम्बर को 11 बजे होगा। 04 दिसम्बर को ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानंद की जयंती एवं गीता जयंती कार्यक्रम होगा। सात दिसम्बर को ब्रह्मलीन शांतानंद का आराधना महोत्सव तथा शिखा चोटी प्रतियोगिता होगी। 08 दिसम्बर को विद्वत सम्मेलन एवं सामाजिक सेवाओं के लिए ‘सम्मान’ कार्यक्रम होगा।
हिन्दुस्थान समाचार/विद्याकान्त
