1 दिसंबर 2025 को मोक्षदा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। यह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जो भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष, पुण्य और जीवन में शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही यह व्रत कुंडली में गुरु ग्रह को भी मजबूत करता है, जिससे साधक को ज्ञान, संतान सुख और विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
इस वर्ष मोक्षदा एकादशी पर भद्रा काल का प्रभाव
1 दिसंबर को भद्रा का साया सुबह 8:20 बजे से शाम 7:01 बजे तक रहेगा। चूँकि भद्रा का वास पृथ्वी पर है, इसलिए इस अवधि में पूजा-पाठ, कथा सुनने या धार्मिक अनुष्ठानों से परहेज करना चाहिए। शाम 7:01 बजे के बाद का समय भगवान विष्णु की आराधना और मोक्षदा एकादशी की कथा के पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इस अवधि में कथा सुनने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और सकारात्मकता का वास होता है।
मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा
मोक्षदा एकादशी की कथा के अनुसार, बहुत समय पहले गोकुल नगर में वैखानस नाम के धर्मात्मा राजा का शासन था। एक रात राजा ने स्वप्न में अपने पिता को नर्क में कष्ट झेलते हुए देखा। दुख में डूबे राजा से उनके पिता ने प्रेत अवस्था में ही अपने उद्धार की याचना की।
अगली सुबह राजा ने नगर के विद्वान ब्राह्मणों को बुलाकर इस स्वप्न का अर्थ पूछा। ब्राह्मणों ने बताया कि पास के जंगल में पर्वत नामक एक ऋषि रहते हैं, जो भूत, वर्तमान और भविष्य के ज्ञाता हैं। राजा ने तुरंत उनके आश्रम की ओर प्रस्थान किया।
पर्वत मुनि ने राजा की बात सुनकर कुछ समय ध्यान लगाया और फिर कहा—
“हे राजन, आपके पिता पिछले जन्म के कर्मों के कारण नर्क में हैं। यदि आप मोक्षदा एकादशी का व्रत रखकर उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित करेंगे, तो उन्हें मुक्ति प्राप्त होगी।”
मुनि की सलाह मानकर राजा वैखानस ने मोक्षदा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया, ब्राह्मणों को भोजन कराया, दान-दक्षिणा दी और वस्त्र वितरित किए। उनके व्रत और पुण्य कर्मों के प्रभाव से राजा के पिता को नर्क से छुटकारा मिला और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
मान्यता है कि जो भी भक्त मोक्षदा एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धा से करता है, उसे भी मोक्ष, पापों से मुक्ति और जीवन के संघर्षों से राहत प्राप्त होती है।
