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लोकनायक जयप्रकाश नारायण: संपूर्ण क्रांति के प्रेरणास्रोत

Date : 11-Oct-2025
जयप्रकाश नारायण, जिन्हें स्नेहपूर्वक जेपी और लोकनायक कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के प्रतीक माने जाते हैं। वे न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि आज़ाद भारत में नैतिक राजनीति और जनहित पर आधारित आंदोलन के अग्रदूत भी रहे।

जेपी का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले में हुआ था। उन्होंने अमेरिका जाकर समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की, जहाँ मार्क्सवादी विचारों का प्रभाव उन पर पड़ा। लेकिन समय के साथ उन्होंने भारतीय संदर्भ में इन विचारों का व्यावहारिक रूप अपनाया और गांधीवादी सिद्धांतों के साथ सामंजस्य बैठाया। वे महात्मा गांधी के अत्यंत प्रिय सहयोगी बने और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

आजादी के बाद, जब बाकी स्वतंत्रता सेनानी सत्ता और राजनीति में रमे, जेपी ने राजनीति से संन्यास लेकर समाज सेवा को चुना। परंतु 1970 के दशक में जब भारत में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक दमन अपने चरम पर था, तब उन्होंने पुनः सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। 1974 में उन्होंने बिहार से "संपूर्ण क्रांति" का नारा दिया – एक ऐसा आंदोलन जो सिर्फ सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए था।

जेपी का यह आंदोलन युवाओं को जगाने वाला साबित हुआ। छात्र, किसान, मजदूर, बुद्धिजीवी – सभी इस क्रांति का हिस्सा बने। लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, रामविलास पासवान जैसे नेता इसी आंदोलन की देन हैं, जिन्होंने बाद में देश और राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई।
1975 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल (Emergency) लागू किया, तब जेपी ने इसका तीव्र विरोध किया। उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाला गया, जहाँ उनकी तबीयत और भी खराब हो गई। इसके बावजूद वे डटे रहे और उनकी अगुवाई में जनता पार्टी का गठन हुआ, जिसने 1977 में इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर कर दिया।

जेपी का आंदोलन मात्र राजनीतिक विरोध नहीं था; यह नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता, और लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए था। उनका जीवन हमें बताता है कि सच्चाई और सिद्धांतों के साथ किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो राजनीति को सेवा का माध्यम मानते हैं। उन्होंने सत्ता नहीं, समाज को बदलने की कोशिश की – और इसी कारण वे एक युगपुरुष माने जाते हैं।

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