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चाणक्य नीति :- कौन किसकी रक्षा करता है

Date : 18-Dec-2024

 वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते |

मृदुना रक्ष्यते भूप: स्तस्त्रिया रक्ष्यते गृहम ||

आचार्य चाणक्य धर्म, विद्या, राजा और घर के रक्षाकारक तत्वों से परिचित कराते हुए कहते हैं, कि धन से धर्म की, योग से विद्या की, मृदुता से राजा की तथा अच्छी स्त्री से घर की रक्षा होती है |

अर्थात् धन से ही मनुष्य अपने धर्म - कर्तव्य का सही पालन कर सकता है | सदाचार, संयम आदि से विद्या की रक्षा होती है | राजा का मधुर स्वभाव ही उसकी रक्षा करता है तथा अच्छे आचरणवाली स्त्री से ही घर की रक्षा होती है |

स्पष्ट है कि धर्म-पालन के लिए धन की, विद्या के गौरव की रक्षा के लिए कर्म-कुशलता की, राजा की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए कोमल व्यवहार की तथा परिवार के सम्मान को सुरक्षित रखने के लिए स्त्री की सच्चरित्रता की आवश्यकता होती है |


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